यूपी एसटीएफ व वाणिज्य कर विभाग की संयुक्त कार्रवाई में डीटीएच कंपनियों द्वारा फर्जी बिल बनाकर 13.09 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है। सौ से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों की टीमों ने लखनऊ, प्रतापगढ़, नोएडा, खीरी व प्रयागराज में एक साथ एक ही समय पर 10 ठिकानों पर छापेमारी कर इसका राजफाश किया।
शुक्रवार रात से शुरू हुई यह कार्रवाई शनिवार तक जारी रही। करीब 14 घंटे तक चली छापेमारी में 6 टीबी इलेक्ट्रॉनिक डाटा सीज किया गया है जिसकी जांच की जा रही है।
लखनऊ में यह छापेमारी राउंड पे ग्रुप गोमतीनगर, ई-मनी इंदिरानगर और मेसेर्स वेलकम कम्यूनिकेशन आलमबाग में हुई। प्रतापगढ़ में रवि एंड ब्रदर्स और नोएडा की क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के ठिकानों पर छापा मारा गया।
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि वाणिज्य कर विभाग ने डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) मल्टी रिचार्ज सर्विस प्रोवाइडर की सर्कुलर ट्रेडिंग का अध्ययन करने पर पाया कि कुछ कंपनियां फर्जी बिलिंग करके राज्य व केंद्र सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगा रही हैं।
इसका खुलासा होने पर वाणिज्य कर विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक सिन्हा के निर्देश पर वाणिज्य कर आयुक्त अमृता सोनी ने आईजी एसटीएफ अमिताभ यश से संपर्क किया।
इसके बाद एसटीएफ व वाणिज्य कर विभाग की कर अनुसंधान इकाई ने इस बिजनेस मॉडल का अध्ययन किया तो पता चला कि यह कारोबार लखनऊ, प्रतापगढ़, नोएडा, प्रयागराज और खीरी में फलफूल रहा है। तय हुआ कि इन सभी कंपनियों पर एक ही दिन और एक साथ छापेमारी की जाए।
इसके लिए मुख्यालय लखनऊ के साथ प्रतापगढ़, खीरी, प्रयागराज एवं नोएडा में छापेमारी का फैसला किया गया। छापेमारी में पता चला कि इन कंपनियों का इलेक्ट्रॉनिक डाटा बहुत ज्यादा है, जिसका सत्यापन मौके पर करना मुमकिन नहीं था।
डाटा इलेक्ट्रॉनिक फार्म में होने से कंपनियां इसे कभी भी डिलीट कर साक्ष्य मिटा सकती थीं। इसलिए बरामद 6 टीबी इलेक्ट्रॉनिक डाटा सीज कर कब्जे में लिया गया।
इन कंपनियों का सीज हुआ डाटा
लखनऊ में राउंड पे ग्रुप गोमतीनगर, ई-मनी इंदिरानगर, मेसर्स वेलकम कम्यूनिकेशन आलमबाग और प्रतापगढ़ की रवि एंड ब्रदर्स समेत 10 कंपनियों का डाटा सीज किया गया। राउंड पे ग्रुप से संबंधित नोएडा की क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से डाटा बैकअप भी लिया गया।
आपस में खरीद-बिक्री दिखाकर किया टैक्स क्रेडिट का दावा
एक ही पते पर संचालित राउंड पे ग्रुप की दो कंपनियों द्वारा जीएसटी पोर्टल पर अपलोड जीएसटी रिटर्न और बिलों की पड़ताल में सामने आया कि राउंड पे ग्रुप की एक कंपनी ने इसी ग्रुप की दूसरी कंपनी से 72.7 करोड़ रुपये की खरीद दिखाकर 13.09 करोड़ रुपये का टैक्स क्रेडिट (आईसीटी) का दावा किया है।
जांच टीम ने इन दोनों कंपनियों के आपस में की गई खरीद-बिक्री का बिल मांगा तो कंपनी के डायरेक्टर व कर्मचारी नियमानुसार जारी कोई बिल नहीं दिखा सके।
जब यह साबित हो गया कि दोनों कंपनियों ने आपस में कोई खरीद बिक्री नहीं की है और चोरी की मंशा से जीएसटी पोर्टल पर 72.7 करोड़ रुपये की आपस में खरीद बिक्री दिखाकर 13.09 करोड़ का फर्जी दावा किया है तो कंपनी के डायरेक्टर ने लिखित रूप से 13.09 करोड़ रुपये की देनदारी स्वीकार की है।
एएसपी साइबर सेल को बनाया गया नोडल अफसर
इस अभियान में अपर पुलिस अधीक्षक (साइबर अपराध) सुनीति को नोडल अफसर नियुक्त किया गया था। एसटीएफ के डीएसपी पीके मिश्र व कर अनुसंधान इकाई के संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पाठक की टीम ने करीब 45 दिन तक इन कंपनियों के व्यापार मॉडल का अध्ययन किया था।