उत्तर प्रदेश में 9149 नई अदालतों के गठन की प्रक्रिया में पहले चरण में 900 अदालतों को मंजूरी मिल गई है। राज्य सरकार ने 17 सितंबर को आदेश जारी किया। इनमें उच्च न्यायिक सेवा, वरिष्ठ और कनिष्ठ सिविल जज स्तर की अदालतें शामिल हैं। हाईकोर्ट ने मामले को अनिश्चितकाल के लिए मुल्तवी कर दिया।
प्रदेश में 9149 नई अदालतों के गठन के मामले में राज्य सरकार की और से हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को बताया गया कि पहले चरण में 900 नई अदालतों को बनाने की कैबिनेट मंजूरी के बाद इसका आदेश 17 सितंबर को जारी कर दिया गया है।
विज्ञापन
इस पर कोर्ट ने मामले को जरूरत पड़ने पर समीक्षा के लिए अनिश्चित काल के लिए मुल्तवी कर दिया। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश प्रदेश के न्यायिक ढांचे को 9,149 नए न्यायालयों के सृजन के माध्यम से मजबूत करने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज की गई जनहित याचिका पर दिया है। इसमें इन नई अदालतों की जल्द स्थापना का मुद्दा उठाया गया था।
पिछली सुनवाई पर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव विधि(एल आर) 23 जुलाई को कोर्ट के समक्ष पेश हुए थे। उन्होंने पीठ को सूचित किया था कि इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। शेष औपचारिकताओं को पूरा करने और सरकारी आदेश जारी करने के लिए दो महीने का समय मांगते हुए मुख्य सचिव ने कहा था कि अब यह प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा।
विज्ञापन
23 जुलाई को सुनवाई के दौरान, पीठ ने गौर किया था कि राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने अक्टूबर 2024 में पहले चरण में 900 अदालतों की स्थापना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। इनमें 225 उच्च न्यायिक सेवा अदालतें, 375 सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) अदालतें और 300 सिविल जज (कनिष्ठ श्रेणी) अदालतें शामिल हैं।