उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल कर ईंधन अधिभार वसूली पर रोक लगाने की मांग की। दाखिल प्रस्ताव में बताया कि ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन प्रकरण में उपभोक्ताओं से 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला जा रहा है। आयोग ने पावर कार्पोरेशन को दोबारा 19 जून तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। कार्पोरेशन ने अपने जवाब में कहा है कि दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में एफपीपीसीए की गणना इसी प्रकार की जाती है।
इसलिए उत्तर प्रदेश में अपनाई गई प्रक्रिया को भी उचित माना जाना चाहिए। कार्पोरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग का अंतिम निर्णय उसे स्वीकार्य होगा। उपभोक्ता परिषद का तर्क है कि अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का हवाला देकर उत्तर प्रदेश के लागू विनियमों का उल्लंघन सही नहीं ठहराया जा सकता। परिषद ने जोर दिया कि जब आयोग स्वयं कार्रवाई को नियमों के विपरीत मान चुका है, तो उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। परिषद ने आयोग से कार्पोरेशन की विवादित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी करने का आग्रह किया है। परिषद ने उन उपभोक्ताओं के पैसे वापस करने या जुलाई के बिल में समायोजित करने की मांग की है जिनसे 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क वसूला गया है। यह कदम उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए आवश्यक अंतरिम राहत के तौर पर देखा जा रहा है।