बांग्लादेश या नेपाल की तर्ज पर देश में आंदोलन संबंधी बयानों को लेकर समाजवादी पार्टी में अंदरखाने मंथन चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी लोकतांत्रिक तौर-तरीकों के दायरे से परे जाकर किसी आंदोलन का समर्थन करने की पक्षधर नहीं है। इसलिए भविष्य में कभी भी आंदोलन ने ऐसा स्वरूप लिया तो सपा का शायद ही उसे समर्थन मिले। इसलिए कॉकरोच पार्टी और जेन-जी के आंदोलन और वैचारिक दिशा पर पार्टी पैनी निगाह भी रखे हुए है।
समाजवादी पार्टी ने दिल्ली में हो रहे जेन-जी आंदोलन का पूरा समर्थन किया है। मैनपुरी से सपा सांसद डिंपल यादव समेत उसके कई वरिष्ठ नेता इस आंदोलन को सक्रिय समर्थन भी दे चुके हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी शुक्रवार को आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को गिरफ्तार किए जाने पर चिंता जताई थी। दूसरी ओर, इसी जेन-जी आंदोलन के बीच से बांग्लादेश में हुए घटनाक्रम से प्रेरणा लेने की बात भी सामने आई है, जिसे भाजपा मुद्दा बना रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि ये लोग देश को अराजकता की ओर धकेलना चाहते हैं।
समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है। लोकसभा में संख्या बल के लिहाज से देश की तीसरी बड़ी पार्टी है। सपा के एक पदाधिकारी नाम न छापने के आग्रह के साथ बताते हैं कि पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर बेहद सतर्क है कि राष्ट्रीय राजधानी के इन आंदोलनों में उसकी भागीदारी से उसकी चुनावी राजनीति पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। पार्टी कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती, जिसे उदार मतदाता गलत रूप में लें। इसको लेकर अपने कार्यकर्ताओं को भी सजग कर रही है।
इस बारे में बात किए जाने पर सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि दिल्ली में जेन-जी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रख रहा है, जिसे सपा का पूरा समर्थन है। भाजपा इसे विदेश से फंडेड बताते हुए युवाओं पर फर्जी मुकदमे लगा रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है। सपा लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध का पूरा समर्थन करती है।