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यूपी: सपा का बड़ा फैसला, किसी प्रत्याशी का आधिकारिक रूप से समर्थन नहीं करेगी पार्टी; इसलिए हुआ ये निर्णय

Mon, 13 Oct 2025 09:35 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Panchayat elections in UP: आने वाले पंचायत चुनाव में सपा सीधे तौर पर अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारेगी। पार्टी में किसी तरह की फूट न हो इसलिए यह फैसला लिया गया है। 
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सपा ने पंचायत चुनाव में सीधे प्रत्याशी न उतारे जाने की रणनीति बनाई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य के पदों पर सपा अपने आधिकारिक प्रत्याशी नहीं उतारेगी। इसकी वजह पार्टी के ही कई कार्यकर्ता एक ही पद के लिए लड़ेंगे। इसलिए इसमें किसी एक का समर्थन आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से ठीक नहीं माना जा रहा है।
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अलबत्ता, पार्टी के जो कार्यकर्ता क्षेत्र पंचायत सदस्य या जिला पंचायत सदस्य के पद पर जीतकर आएंगे, उनको लेकर पार्टी ब्लॉक प्रमुख या जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए रणनीति बनाएगी। हालांकि, इस बारे में पार्टी की ओर से अपनी रणनीति का आधिकारिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है।
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आकाश पर अखिलेश का हमला सपा की आक्रामक रणनीति का संकेत

 सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का बसपा नेता आकाश आनंद पर हमला सपा की बदली रणनीति का संकेत माना जा रहा है। अखिलेश ने जहां भाजपा-बसपा में अंदरूनी सांठगांठ का आरोप लगाया है, वहीं यह भी कहा है कि बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की जरूरत भाजपा को ज्यादा है। इसे इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि आकाश बसपा में मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर माने जाते हैं। वे बसपा सुप्रीमो के भतीजे भी हैं। मायावती ने 9 अक्तूबर को लखनऊ की रैली में सपा के पीडीए अभियान पर जमकर निशाना साधा था। बता दें, सपा और बसपा ने वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था। इसके बाद से अखिलेश, मायावती या उनके परिवार के राजनीतिक सदस्यों पर सीधा हमला करने से बचते रहे हैं।

 इसलिए जब अखिलेश ने आकाश आनंद को लेकर अपने एक्स अकाउंट पर टिप्पणी की तो इसके राजनीतिक निहितार्थ तलाशे जाने लगे। इससे यह भी साफ हो गया है कि सपा अध्यक्ष अब बसपा पर सीधे राजनीतिक हमले के मूड में हैं। जानकार कहते हैं कि सपा अच्छी तरह समझती है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता तक पहुंचने के लिए दलित मतदाताओं का साथ जरूरी है। कभी दलित वोटबैंक पर बसपा का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में भाजपा ने इसमें सेंध लगाई है। 

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा भी दलितों का वोट पाने में सफल रही। इसलिए अखिलेश ने पार्टी नेताओं को दलितों के बीच सक्रियता बढ़ाने का न सिर्फ संदेश दिया है, बल्कि जहां कहीं भी दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है उसे प्रमुखता से उठाने का फैसला भी किया है। रायबरेली में वाल्मीकि युवक की हत्या इसका ताजा उदाहरण है। हालांकि, आकाश आनंद पर अखिलेश की टिप्पणी का भाजपा के किसी प्रमुख नेता की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
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