तीन जीत के बाद 2020 में मिली थी हार
डॉ. एसपी सिंह ने वर्ष 2002 में करीब 1,500 मतों के अंतर से पहली जीत दर्ज की थी। 2008 में जीत का अंतर बढ़कर करीब 5,500 मत हो गया। वर्ष 2014 में कांति सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीती थीं और करीब 9,700 मतों से जीत हासिल की थी। हालांकि, 2020 के चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी से करीब छह हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा था। छह साल बाद उन्होंने सपा के टिकट पर जीत दर्ज कर सीट फिर परिवार के पास पहुंचा दी।
हार से दोगुने से अधिक अंतर से जीत
मतगणना के आठवें चक्र तक कांति सिंह को 51,168 और भाजपा प्रत्याशी ई. अवनीश कुमार सिंह को 36,313 मत मिले थे। इस चरण में कांति सिंह 14,855 मतों से आगे थीं। अंतिम परिणाम में उनकी जीत का अंतर 15 हजार से अधिक रहा।
युवाओं को रोजगार से जोड़ना प्राथमिकता
जीत के बाद कांति सिंह ने युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, करियर काउंसलिंग मजबूत करने और शिक्षा का बेहतर माहौल बनाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में सपा सरकार बनने पर स्नातक बेरोजगारों को रोजगार भत्ता देने और वित्तविहीन शिक्षकों को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। उनके पति एवं प्रतापगढ़ से सपा सांसद डॉ. एसपी सिंह ने मतगणना निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए जिला प्रशासन का आभार जताया।