राहुल गांधी और अखिलेश यादव।
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लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके आम मतदाताओं को यह संदेश देने में सफलता हासिल कि वो राष्ट्रीय स्तर पर भी एक विकल्प हो सकती है। हालांकि, लोकसभा के अंदर सपा और कांग्रेस के बीच उद्योगपति गौतम अदाणी के मुद्दे पर मतभेद भी खुलकर सामने आए। लखनऊ विवि के राजनीति शास्त्र के प्रो. संजय गुप्ता मानते हैं कि भविष्य में भी सपा-कांग्रेस के गठबंधन कायम रहने से दलित-ब्राह्मण समीकरणों का और भी फायदा इस गठबंधन को मिल सकता है। वर्ष 2024 में इंडिया गठबंधन ने जहां यूपी में कामयाबी हासिल की, वहीं आपसी समन्वय की कमी से गठबंधन में दरार भी महसूस की जा रही है। जिसे गाहे-बगाहे दोनों दलों के दूसरी व तीसरी पंक्ति के नेता जाहिर भी कर रहे हैं।
पीडीए की बदलते मायने भी देखे
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा ने पीडीए का नारा दिया, लेकिन इसकी परिभाषाएं भी अलग-अलग तरह की दीं। पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक से शुरू होकर यह पिछड़े-दलित-आधी आबादी, फिर पिछड़े-दलित-गरीब अगड़े से होते हुए पीड़ित-दुखी-अपमानित तक पहुंचा।