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यूपी: कांग्रेस को 45 से 50 सीट से ज्यादा नहीं देने के मूड में है सपा, इस आधार पर टिकट बांटने की है तैयारी

Thu, 17 Sep 2026 07:24 AM IST
रोहित मिश्र अजीत बिसारिया, अमर उजाला नेटवर्क लखनऊ

सार

SP Congress alliance: यूपी में चुनाव की आहट के बीच सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बातचीत तेज हो गई है। इस बारे में दोनों पार्टियां अपने-अपने दावे कर रही हैं। 
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यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस 100 से अधिक सीटों पर दावा कर रही है, जबकि सपा नेतृत्व ने संकेत दिया है कि सीटों का बंटवारा संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की मजबूती और जीत की संभावनाओं के आधार पर होगा। ऐसे में कांग्रेस के हिस्से में 40-50 सीटें आने की चर्चा है।

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उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं, इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक सपा और कांग्रेस ने भी विधानसभा स्तर पर संगठन को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। वर्ष 2022 में सपा और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। सपा ने 111 सीटें जीती थीं। उस समय सपा गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने 8 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने 6 सीटें जीती थीं। बाद में दोनों दल सपा से अलग हो गए। कांग्रेस को 2022 में सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी।

कांग्रेस कर रही है 100 सीटों का दावा

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव। - फोटो : पीटीआई
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत कांग्रेस ने 100 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, इसलिए इस बार भी उसे 100 से अधिक सीटें मिलनी चाहिए। हालांकि, 2017 में यह गठबंधन भाजपा के हाथों सत्ता हासिल नहीं कर सका। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि सवाल सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि जीत का है। सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस जिन सीटों की मांग कर रही है, वहां उसे अपने मजबूत उम्मीदवारों का विवरण देना होगा। उम्मीदवार की जीत-हार की संभावनाओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरण के आधार पर सीटों पर फैसला होगा। सपा नेतृत्व का मानना है कि सरकार बनाने के लिए प्रत्येक सीट महत्वपूर्ण है। ऐसे में कमजोर उम्मीदवार को मैदान में उतारना गठबंधन के लिए नुकसानदेह हो सकता है। कांग्रेस के अधिक सीटों पर अड़े रहने की स्थिति में सपा अपने स्तर पर निर्णय ले सकती है।
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राजभर-निषाद का प्रस्ताव लाने पर भी कार्रवाई

राजनीतिक हलकों में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद के एनडीए से अलग होने की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं। दोनों उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उनके दल एनडीए का हिस्सा हैं। सपा के एक प्रमुख रणनीतिकार के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि सुभासपा या निषाद पार्टी से गठजोड़ का प्रस्ताव लाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ तत्काल संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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