पिता का दावा- मेरे पास पूरे साक्ष्य
परिजनों को बाद में पता चला कि बिजनौर के नूरपुर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 341/2024 में दोनों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस रिकॉर्ड में उनकी गिरफ्तारी बिजनौर के गोहावर चौराहे से दिखाई गई। महेंद्र सैनी का दावा है कि उनके पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो से साबित होता है कि राहुल और कविंद्र को लखनऊ स्थित आवास से ले जाया गया था।
जमानत कराकर बेटों को कराया रिहा
महेंद्र सिंह के अनुसार, बिजनौर पुलिस ने उनके दोनों बेटों को दंगा, घातक हथियार से हमला और हत्या के प्रयास जैसी धाराओं में गिरफ्तार किया था। उन पर मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने, अपमान और धमकी के आरोप भी लगाए गए थे। गिरफ्तारी के बाद दोनों बेटों को जेल भेज दिया गया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई।
कोर्ट की मदद से दर्ज कराई एफआईआर
महेंद्र सैनी ने घटना के बाद स्थानीय पुलिस से लेकर पुलिस आयुक्त तक शिकायतें कीं। उन्होंने मानवाधिकार आयोग और शासन स्तर पर भी शिकायतें भेजीं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। इंस्पेक्टर पीजीआई सुनील सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई है। नूरपुर थाने के तत्कालीन दरोगा गौतम, कॉन्स्टेबल अमित कुमार, कॉन्स्टेबल राहुल और दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ जांच की जा रही है।