तकनीकी समस्या से बढ़ी मुसीबत
ऊर्जा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि परेशानी की वजह तकनीक भी है। सर्वर पर लोड अधिक है। उपभोक्ताओं तक बैलेंस का मैसेज पहुंचता नहीं है अथवा वे देखते नही हैं। कनेक्शन कटते पर सचेत होते हैं। कनेक्शन जोड़ने का दबाव बढ़ता है तो टेक्निकल फॉल्ट होता है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा भी कुछ ऐसा ही तर्क देते हैं। वे बताते हैं कि मीटर डाटा मैनेजमेंट (एमडीएम) का सर्वर लोड नहीं ले रहा है। स्मार्ट प्रीपेट मीटर के हार्डवेयर में चाइनीज उपकरण लगाए गए हैं।
इसी तरह की अन्य तकनीकी खामियां हैं। लोड बढ़ते ही सिस्टम हैंग कर जाता है। ऐसे में तमाम उपभोक्ताओं का रीकनेक्शन (दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया) नहीं हो पाती। यही वजह है कि उपभोक्ताओं और अभियंताओं को कनेक्शन जुड़वाने के लिए लगानी पड़ रही है।
दो घंटे में कनेक्शन न जुड़े तो 1912 करें कॉल
निदेशक (वाणिज्य) पावर कार्पोरेशन प्रशांत वर्मा ने बताया कि तकनीकी कारणों से दो चार केस में देरी हो सकती है। बिल जमा करने के दो घंटे के अंदर आपूर्ति शुरू न हो तो तत्काल 1912 पर शिकायत करें। उन शिकायतों के आधार पर तत्काल कनेक्शन जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
इसके लिए अलग से सेल बना दिया गया है। प्रीपेड स्मार्ट मीटर आटोमैटिक है। बैलेंस 30 प्रतिशत बचने पर पहला, 10 प्रतिशत पर दूसरा और माइनस बैलेंस होने से तीसरा मैसेज जाता है। कुछ उपभोक्तओं ने मोबाइल नंबर बदल लिया है, उन्हें समस्या हो सकती है। ऐसे उपभोक्ता अपना नया नंबर अपडेट करा दें।
यहां कर सकते हैं रिचार्ज
प्रीपेड स्मार्ट मीटर से आपूर्ति बंद होने पर यूपीपीसीएल स्मार्ट एप, विभागीय वेबसाइट, भीम, फोनपे, गूगल पे, विभाग के काउंटर या जन सुविधा केंद्रों पर भुगतान किया जा सकता है। स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता खपत, बिल और बैलेंस की जानकारी मोबाइल एप और विभागीय वेबसाइट पर देख सकते हैं। प्रीपेड उपभोक्ता को बिजली बिल में दो फीसदी की छूट दी जाती है।
पुराने बैलेंस से भी गफलत
स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदलने की वजह से तमाम उपभोक्ताओं का पहले से ही बताया है। अंतिम पोस्ट-पेड बिल से प्री-पेड परिवर्तन की तारीख तक के बकाये बिल का भुगतान भी उपभोक्ता को करना है।
ऐसे में पूर्व के पोस्ट-पेड बिलों के बकाये की राशि हर रिचार्ज से अपने आप समायोजित की जाती है।
उदाहरण के लिए किसी घरेलू उपभोक्ता का 10 हजार बकाया है। हर रिचार्ज पर 10 प्रतिशत देना होगा। इसी तरह 10 से 15 पर 15 प्रतिशत, 15 से 20 तक 20 प्रतिशत और 20 से अधिक पर 25 प्रतिशत धनराशि समायोजित की जाती है।