शासन स्तर पर एवी राजमौलि व बी. चंद्रकला सहित चार आईएएस अधिकारी कई दिनों से तैनाती की प्रतीक्षा में हैं। लेकिन राजस्व परिषद से हाल में हटाए गए दो में से एक अफसर को जल्द पोस्टिंग दिलाने की कवायद से जल्दी ही सभी प्रतीक्षारत अफसरों को तैनाती मिल सकती है। इसके लिए लामबंदी शुरू हो गई है।
एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का तर्क है कि जिन न्यायिक फैसलों पर किसी दूसरे न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, उस निर्णय को ध्यान में रखकर एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का वेटिंग में तबादले का चलन ठीक नहीं है। शासन की मंशा के हिसाब से फैसले न करने पर इस तरह तबादले अन्य अफसरों को संदेश देने की कोशिश लगती है। खास बात यह है कि यदि फैसले में कहीं चूक लगती है या खराब मंशा से फैसला लिया गया लगता है तो अपीलीय न्यायालय उस पर गौर कर टिप्पणी कर सकता है और फैसला पलट भी सकता है। सरकार बाद में उस आधार पर कार्रवाई भी कर सकती है। लेकिन इसके पहले ही दखल खराब संदेश देता है। दूसरा, वेटिंग अवधि में वेतन नहीं मिलता है। लेकिन पोस्टिंग होने पर वेटिंग अवधि का पूरा वेतन मिल जाता है। यानी बिना काम पूरा वेतन। यह विसंगति भी अहम है।
जानकार बताते हैं कि इस तर्क का अर्थ साफ है कि इन अफसरों को जल्द पोस्टिंग दिलाने को लेकर लामबंदी शुरू हो गई है। ऐसे में वेटिंग से जुड़े अन्य अफसरों के साथ ही राजस्व परिषद से हटाए गए अफसरों को भी नई तैनाती मिल सकती है। हो सकता है इनकी नई तैनाती कम महत्व के पदों पर हो।
ये अधिकारी प्रतीक्षा में
- एवी राजमौलि अंतर्राज्यीय प्रतिनियुक्ति से लौटे
- बी. चंद्रकला, स्टडी लीव से लौटीं।
- शिवकांत द्विवेदी, एलडीए वीसी के पद से हटाए जाने के बाद से।
- डॉ. गुरदीप सिंह, राजस्व परिषद से हटाए गए।
- राजीव शर्मा, राजस्व परिषद से हटाए गए।
- केदारनाथ सिंह, निलंबन समाप्त।