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UP: प्रदेश में बैंक ऋण वसूली में बड़ा सुधार, एक साल में 13.91 लाख आरसी और 19 हजार करोड़ की देनदारी घटी

Sat, 11 Jul 2026 07:53 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

प्रदेश में बैंक ऋण वसूली में सुधार दर्ज हुआ है। लंबित रिकवरी सर्टिफिकेट और बकाया राशि में बड़ी कमी आई है। सरफेसी मामलों का भी निस्तारण बढ़ा है। बैंकों ने लंबित मामलों के त्वरित समाधान, संपत्ति कब्जा प्रक्रिया तेज करने और निगरानी के लिए अलग डिजिटल पोर्टल बनाने का प्रस्ताव दिया है।
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Istock
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विस्तार
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पिछले एक साल में बैंक ऋण वसूली की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बैंकों ने शासन को भेजी संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक लंबित रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) 23.23 लाख से घटकर 9.32 लाख रह गए, यानी 13.91 लाख की कमी आई।इनसे जुड़ी लंबित राशि भी 36,994 करोड़ रुपये से घटकर 17,856 करोड़ रुपये रह गई।

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वहीं, सरफेसी अधिनियम के तहत लंबित आवेदन 4,953 से घटकर 4,497 रह गए। हालांकि रिपोर्ट में जिला स्तर पर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और सरफेसी मामलों की निगरानी के लिए अलग पोर्टल विकसित करने की जरूरत भी बताई गई है।

456 मामलों का निस्तारण हुआ

स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की दिसंबर 2024 और मार्च 2026 की रिपोर्ट की तुलना करें तो बैंक ऋण वसूली में उल्लेखनीय सुधार सामने आया है। सरफेसी अधिनियम के तहत जिला मजिस्ट्रेटों के स्तर पर लंबित मामलों में भी मामूली सुधार हुआ है। दिसंबर 2024 में ऐसे 4,953 आवेदन लंबित थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 4,497 रह गए। यानी 456 मामलों का निस्तारण हुआ।

बैंकों ने कहा है कि जिला स्तर पर संपत्ति का कब्जा दिलाने में देरी के कारण बैंकों की ऋण वसूली प्रभावित हो रही है। इस कारण बैंकों ने राजस्व विभाग और जिला प्रशासन से लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कराने का अनुरोध किया है।

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बैंकों ने वर्ष 2026 में सरफेसी मामलों की निगरानी के लिए अलग पोर्टल विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए राजस्व विभाग, गृह विभाग, एसएलबीसी और प्रमुख बैंकों की संयुक्त बैठक आयोजित कर प्रारूप अंतिम रूप देने की बात कही गई है। 

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बैंकों द्वारा ऑनलाइन दर्ज आरसी के आंकड़ों और वास्तविक वसूली के मिलान के लिए राजस्व परिषद को पोर्टल अपडेट करने और स्थिति का समन्वय करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा सरफेसी मामलों में भौतिक कब्जा दिलाने की प्रक्रिया तेज करने पर भी जोर दिया गया है।

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