गिरफ्तारी के बाद की प्रक्रिया में काफी वक्त लगा। इस वजह से मंगलवार को पुलिस आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड के लिए कोर्ट में पेश नहीं कर सकी। इसलिए रात को नागपुर के हुडकेश्वर थाने में तीनों को रखा। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे आरोपियों को में पेश किया गया। ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद पुलिस आरोपियों को लेकर रवाना हो सकी। पुलिस उनको लेकर बृहस्पतिवार सुबह तक लखनऊ पहुंच सकती है। यहां भी उनको कोर्ट में पेश किया जाएगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
पुलिस ने तीनों पर ईनाम घोषित कर गैर जमानती वारंट जारी कराया था। आरोपी पुलिस को कदम-कदम पर मात दे रहे थे। पुलिस के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी करना चुनौती बन गया था। इसलिए साथ में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया था। सोमवार रात आरोपियों की लोकेशन नागपुर की तरफ मिली। इसके बाद टीमें रवाना हुईं। ट्रेस करते-करते मंगलवार दोपहर लखनऊ पुलिस और एसटीएफ ने नागपुर पुलिस की मदद से प्रोजोन पॉम्स अपार्टमेंट, नागपुर के स्प्लेंडर-टू टॉवर के एस-2, 1103 नंबर फ्लैट में दबिश दी। फ्लैट में श्रद्धा दुबे, रश्मि और ड्राइवर दानिश मिले। पुलिस ने तत्काल तीनों की गिरफ्तारी की।
श्रद्धा दुबे को पुलिस ने पकड़ लिया।
- फोटो : अमर उजाला
शातिर श्रद्धा दुबे ने पुलिस को दस दिनों तक छकाया। श्रद्धा अपनी बहन और ड्राइवर के साथ करीब 2200 किमी का सफर किया। होटलों व लॉज में ठहरीं। वह आगे आगे चल रही थीं और उनके पीछे-पीछे पुलिस खाक छानती रही। आठ से दस ऐसे ठिकाने हैं जहां से पुलिस के पहुंचने के पांच-छह घंटे पहले ही ये तीनों निकल जाते थे। यही वजह है कि पुलिस की नाकामी की कहानी बढ़ती गई। 11वें दिन जाकर पुलिस उस तक पहुंच सकी।
वारदात की रात यानी 9 अक्तूबर को श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश के साथ घायल शिवा को लेकर केजीएमयू पहुंची थीं। फिर यहीं से वह निकल गई थी। लखनऊ से सीधे वह सीतापुर महमूदाबाद होते हुए बहराइच पहुंची। यहां रुपईडीहा बॉर्डर पार कर नेपाल में दाखिल हो गई थी। पुलिस के मुताबिक नेपाल के बुटवल में गई। यहां बिना आईडी वाले एक होटल में रुकी। तभी पुलिस को उसके नेपाल जाने की सूचना मिल गई थी।