उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान
जीआरपी रेलवे एक्ट की धारा 152 के तहत कार्रवाई करती है, जिसमें न्यूनतम 10 वर्ष से उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। आरपीएफ केवल सात साल तक की सजा वाले मामलों में ही कार्रवाई कर पाती है। जीआरपी दोषियों को सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का उपयोग कर रही है। मुखबिर तंत्र भी विकसित किया जा रहा है और संदिग्धों का त्रिनेत्र एप से डिजिटल सत्यापन होता है। रेलवे को भी निर्माण सामग्री सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।
सुरक्षा जीआरपी की पहली प्राथमिकता
डीजी जीआरपी प्रकाश डी. ने बताया कि रेलवे ट्रैक और ट्रेनों को निशाना बनाने वाले अराजक तत्वों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जा रही है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की मदद से ऐसे मामलों की सुनवाई रोजाना कर सजा कराई जा रही है। रेल यात्रियों की सुरक्षा जीआरपी की पहली प्राथमिकता है।