ब्यूरोक्रेसी में ऐसे भी अजूबे
आमतौर पर सबकी नजरें ब्यूरोक्रेट्स की संपत्ति पर रहती हैं। इससे भांपा जाता है कि उन्होंने जनता की कितनी सेवा की और खुद की कितनी। कई बार उनकी संपत्तियों का ब्योरा देख बड़े कारोबारी भी दंग रह जाते हैं। हालांकि, प्रदेश कैडर के एक ब्यूरोक्रेट ऐसे भी हैं, जिनके पास कोई संपत्ति नहीं है।
कई साल पहले प्रदेश के शो-केस वाले शहर में एक प्लॉट था, जिसे बेच चुके हैं। परिवार को मजबूत करने या टैक्स बचाने के लिए करीब दस साल से कोई दूसरी संपत्ति नहीं खरीदी। उनकी यह ईमानदारी एक केंद्रीय एजेंसी की नजरों में आ चुकी है। सुराग लगाया जा रहा है कि इस साफगोई के पीछे कोई खेल तो नहीं चल रहा।
साहब की शह पर करोड़ों का खेल
लखनऊ पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन ठगी के गिरोह का राजफाश किया। आज तक के इतिहास की सबसे बड़ी गिरफ्तारी की। पुलिस की खूब वाहवाही भी हो रही है। अब पर्दे के पीछे का खेल समझिए। जो गिरोह पकड़ा गया उसको एक डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी का संरक्षण था।
बाकायदा महीना बंधा हुआ था। पूरा भरोसा दिया गया था कि कॉल सेंटर चलाइए, कुछ नहीं होगा। यही हो भी रहा था। हर महीने करोड़ों का खेल जारी था। साहब की जेब भी गर्म हो रही थी। अब जब कार्रवाई हुई तो साहब सकते में हैं। हर महीने नुकसान तो हुआ ही, उनका राजफाश न हो जाए, इसका डर सता रहा है।
गोपनीय टूर पर माननीय
एक माननीय की गोपनीय यात्रा की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। दरअसल, मौजूदा समय में माननीय अपने महकमे में राज्य स्तरीय नायब हैं। हाल ही में सत्ता के कुनबा का विस्तार हुआ तो माननीय ने खूब जोर लगाया था कि प्रमोशन हो जाए।
तमाम शुभचिंतकों से काम का बयाना भी ले लिया लेकिन प्रमोशन की सूची आई तो माननीय का नाम नदारद था। लिहाजा बयाना देने वाले अब माननीय को खोज रहे हैं। उधर, माननीय भी मौका भांप गोपनीय टूर पर चले गए हैं। इधर, बयाना देने वाले उनकी वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।