फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी : वरिष्ठ रंग कर्मी व फिल्म कलाकार विनय श्रीवास्तव का निधन, 75 से ज्यादा नाटकों का मंचन किया था

Sat, 06 Dec 2025 08:02 AM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ के वरिष्ठ रंगकर्मी और फिल्म कलाकार विनय श्रीवास्तव का 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने 75 से अधिक नाटकों, कई फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया और रंगमंच के क्षेत्र में उनका योगदान बेहद उल्लेखनीय रहा।
विज्ञापन
वरिष्ठ रंग कर्मी व फिल्म कलाकार विनय श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित विनय श्रीवास्तव का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। अंतिम संस्कार आज 12:30 बजे बैकुंठ धाम लखनऊ में किया जाएगा। शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी गोपाल सिन्हा ने बताया कि उनका जन्म अक्तूबर 1949 को हुआ था। 
विज्ञापन


19 वर्ष की आयु में उनकी नौकरी फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में लगी थी। वे 2009 में सेवानिवृत्त हो गए थे। नाटकों में शुरू से ही वे सक्रिय रहे और 75 से ज्यादा नाटकों में उन्होंने अभिनय किया। उन्होंने कई फिल्मों में भी अभिनय किया। 

उनकी पहली फिल्म रितु खन्ना के निर्देशन में 1985 में रिलीज हुई जिसका नाम था मै चुप नही रहूंगी। राजबब्बर और शबाना आजमी के साथ भी उन्होंने एक फिल्म में काम किया। लखनऊ के सुनील बत्ता रे निर्देशन में फिल्म "अम्मा" (2003) में उन्होंने सआयशा जुल्का और संजय मिश्रा के साथ काम किया। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में भी काम किया। 
विज्ञापन


1992-93 और उन वर्षा में सुनील बत्ता द्वारा प्रेमचन्द, यशपाल, भगवती चरण वर्मा की कहानियों पर निर्मित अनेकों एपिसोड में अभिनय किया। रंगमंच में उत्कृष्ट योगदान के लिए विनय श्रीवास्तव को  वर्ष 2000 में उ प्र संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया।

अधिकतर पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई

76 वर्ष की जीवन में उनके पीछे 50 वर्षो का लंबा रंगकर्म का इतिहास जुड़ा है, जिसमें रेडियो नाटक, दूरदर्शन के लिए नाटक, रंगमंच से जुड़े तकरीबन 150 नाटकों में उन्होंने काम किया और 30 नाटकों का निर्देशन किया। कुछ वर्ष पूर्व उनके निर्देशन में मचित नाटक माधवी बहुत चर्चित रहा था. भीष्म साहनी के उपन्यास पर आधारित इस नाटक का मंचन अपने आप में एक चुनौती  था।

उसके अलावा उन्होंने मिस अहलूवालिया, देश हुवा बेगाना, रक्त बीज,  बेगम हज़रत महल, पीतल का टुकड़ा, भारत एक खोज, तमस आदि नाटकों और धारावाहिको में हर तरीके के किरदार निभाए। उन्होंने कई फिल्मों में भी काम किया जिसमें मैं चुप नहीं रहूंगी, मुल्क, राजी आदि थी। अभिनय की हर विधा में उन्होंने काम किया। फिर भी अपनी लंबी चौड़ी कद काठी और भारी भरकम आवाज के कारण वह अधिकतर पुलिस अधिकारी की भूमिका और खलनायक की भूमिका में नजर आते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें