परिवहन विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए चैटबॉट शुरू किया है। इसमें व्हाट्सएप नंबर पर यात्रियों को डीएल से लेकर वाहनों तक से जुड़ी सारी जानकारियां मिलती हैं। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल सहित देश के 20 राज्य यूपी की इस व्यवस्था को अपने यहां लागू करेंगे।
यह कहना है ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ मोटर व्हीकल डिपार्मेंट टेक्निकल एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष अशफाक अहमद का। वह फेडरेशन व उत्तर प्रदेश डिपार्मेंट रीजनल इंस्पेक्टर टेक्निकल सर्विस एसोसिएशन की तरफ से एक निजी होटल में आयोजित में रोड सेफ्टी वर्कशॉप में बोल रहे थे। उन्होंने कहाकि हमारी कोशिश होगी कि उत्तर प्रदेश कि इस चैटबॉट सुविधा को 20 राज्यों में लागू कराया जाए, ताकि यात्रियों को राहत हो। व्हाट्सएप पर एक नंबर 8005441222 सेव करने के बाद चैटबॉट से परिवहन विभाग की ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन से जुड़ी तमाम सेवाओं की जानकारी पलभर में मिल जाती है। बहुत सी समस्याएं चैटबॉट खत्म कर रहा है।
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उन्होंने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बृजेश नारायण सिंह के इस कदम को सराहा। विभाग का सोशल मीडिया बहुत ही अच्छे ढंग से कार्य कर रहा। कार्यक्रम में परिवहन आयुक्त बीएन सिंह, महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विवेक भीमानवर, रोड सेफ्टी अथॉरिटी गुजरात के सेवानिवृत्त आयुक्त एसए पटेल एमवीआई विष्णु कुमार व प्रशांत कुमार उपस्थित रहे।
एमवीआई को मिले चेकिंग का अधिकार
नासिक के एआरटीओ सचिन कुमार ने कहाकि उत्तर प्रदेश में संभागीय निरीक्षकों(आरआई) को मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर(एमवीआई) का पदनाम मिल गया है, लेकिन उन्हें वाहन चेकिंग के अधिकार नहीं मिले हैं। अधिकार मिलने पर वाहनों की तकनीकी जांच होगी और सड़क हादसे रुकेंगे। देश में कई राज्य अभी भी ऐसे हैं, जहां आरआई हैं और वे सिर्फ डीएल व फिटनेस के काम कर रहे हैं। एमवीआई जब सड़क पर जांच करने उतरेंगे तो गाड़ियों में क्या टेक्निकल खामियां हैं, उसे जांच सकेंगे। यह चिंता की बात है कि प्रदेश में 120 एमवीआई के पद हैं, जिनमें सिर्फ 75 पर ही तैनाती है। यह संख्या भी कम है। महाराष्ट्र में एक हजार से अधिक एमवीआई हैं।
आरटीओ-एआरटीओ भी हों तकनीकी रूप से योग्य
संगठन की तरफ से यह भी मांग रखी गई कि टेक्नोलॉजी का जमाना है। परिवहन विभाग में एमवीआई की तरह ही अब एआरटीओ और आरटीओ के पद भी तकनीकी योग्यता रखने वालों को तरजीह दी जाए। टेक्निकल अधिकारी नॉन टेक्निकल का काम कर सकता है। लेकिन नॉन टेक्निकल अधिकारी टेक्निकल का कामकाज नहीं संभाल सकता।