सत्यापन के दौरान जिला पुलिस या एलआईयू मौके पर जाकर पूछताछ नहीं करेगी। अभ्यर्थियों की भौतिक उपस्थिति की अनिवार्यता भी नहीं होगी। पुलिस और एलआईयू अपने मौजूदा अभिलेखों के आधार पर रिपोर्ट देंगी। अगर किसी अभ्यर्थी के खिलाफ पुलिस या एलआईयू की रिपोर्ट प्रतिकूल पाई जाती है, तो जिलाधिकारी अपनी संस्तुति भेजने से पहले अभ्यर्थी को भौतिक या ऑनलाइन माध्यम से अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देंगे।
केवल चरित्र सत्यापन लंबित होने के कारण नियुक्ति पत्र का वितरण रोका नहीं जाएगा। अभ्यर्थी से स्व-घोषणा पत्र और निर्धारित प्रपत्र लेकर औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी किए जा सकेंगे। हालांकि, गलत जानकारी देने या सत्यापन फेल होने पर नियुक्ति तत्काल रद्द कर दी जाएगी और विधिक कार्रवाई होगी।
जो अभ्यर्थी पहले से ही किसी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उनके नए सिरे से पूर्ववृत्त और चरित्र सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी, हालांकि उनके पिछले विभाग से जरूरी जानकारी मंगाई जा सकती है। वहीं, राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं माना जाएगा, लेकिन हिंसात्मक तरीके से व्यवस्था बदलने वाले संगठनों से जुड़े लोग अपात्र होंगे। 21 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने के बाद और जांच की तिथि से तीन वर्ष के भीतर किसी भी ऐसी गतिविधि में भाग लेने को इस बात का प्रमाण माना जाएगा कि व्यक्ति अभी भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न है, जब तक कि समय के इस अंतराल में उसकी प्रवृत्ति में परिवर्तन के सकरात्मक प्रमाण उपलब्ध न हों।