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यूपी: कफ सिरप कांड के बाद बदले नियम, दवा लाइसेंस में परिसर की जीपीएस हुआ अनिवार्य; देनी होगी पड़ोसी की डिटेल

Sun, 04 Jan 2026 10:48 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Rules for selling medicines in UP: कोडीन कफ सिरप प्रकरण के सामने आने के बाद लाइसेंस जारी करने में नियमों की अनदेखी की शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों की जांच की जा रही है।


 
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कफ सिरप कांड के बाद बदले नियम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 प्रदेश में थोक दवा लाइसेंस लेने के नियमों को कड़ा कर दिया गया है। लाइसेंस लेते समय अब संबंधित दुकान और गोदाम की जियो टैगिंग कराई जाएगी। इसके लिए आवेदक की मौजूदगी में प्रस्तावित परिसर का जीपीएस विवरण देना होगा। औषधि निरीक्षक की ओर से हर माह जारी लाइसेंसों में 10 फीसदी का रैंडम सत्यापन सहायक आयुक्त को करना होगा। यही नहीं अब आवेदक को अनुभव प्रमाणपत्र के साथ संबंधित फर्म में नौकरी करने के दौरान मिले वेतन का भी प्रमाण (पे स्लिप) देना होगा।

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कोडीन कफ सिरप प्रकरण के सामने आने के बाद लाइसेंस जारी करने में नियमों की अनदेखी की शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों की जांच की जा रही है। इसकी जद में कई औषधि निरीक्षक और सहायक आयुक्तों का आना तय है। इस बीच औषधि आयुक्त डा. रोशन जैकब ने लाइसेंस जारी करने के नियमों का कड़ा करते हुए उसका पूरी तरह से पालन करने का निर्देश दिया है। लाइसेंस के लिए आवेदन पत्र में नाम, पता, मोबाइल नंबर पैन, आवास सहित अन्य के साथ ही अब आवेदक का तीन वर्ष में किए गए व्यवसाय अथवा पेशए के संबंध में शपथ पत्र लिया जाएगा। 

फार्मासिस्ट का पूरा विवरण देने के साथ ही उसके अनुभव प्रमाण पत्र का विशेष ध्यान रखा जाएगा। जिन फर्मों के लाइसेंस निरस्त होंगे अथवा उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी, उनका अनुभव प्रमाण पत्र वैध नहीं माना जाएगा। अनुभव प्रमाण पत्र देने वाली फर्म से दिए गए वेतन भुगतान, उपस्थिति/वेतन पंजिका, वैध लाइसेंस सहित अनुभव प्रदाता फर्म का शपथ पत्र भी अनिवार्य कर दिया गया है। प्राइवेट लिमिटेड अथवा लिमिटेड कंपनी के लिए प्रबंधकों की सूची व दैनिक व्यवसाय के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का शपथ पत्र लिया जाएगा। दुकान और गोदाम आवेदन के खुद का नहीं होगा तो किरायेनामे के बजाय रजिस्टर्ड किरायानामा देना होगा। दुकान व परिसर की जीओ टैगिंग की जाएगी। परिषद में दवा की उपलब्धता, रेफ्रिजरेटर, कोल्ड रूम बिजली आदि की व्यवस्था देखी जाएगी। इतना ही नहीं आसपास के दुकानों का भी पूरा विवरण देना होगा।

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हर माह 10 फीसदी की रैंडम जांच जरूरी

औषधि निरीक्षकों द्वारा पोर्टल पर लाइसेंस के लिए आने वाले आवेदनों की जांच के बाद सभी तरह की कमियां एक बार में ही बतानी होगी। फर्म में जितने लोगों का नाम शामिल होगा, उन सभी का विवरण जांचा जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि उनमें शामिल कोई ऐसा व्यक्ति तो नहीं है, जो पहले लाइसेंस लिया हो और नारकोटिक्स एक्ट में उसका लाइसेंस निरस्त हुआ है। औषधि निरीक्षक द्वारा जांच के समय यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रस्तावित प्रतिष्ठान किसी अवासीय मकान/पूर्णतः रिहायशी क्षेत्र में स्थित न हो। औषधि निरीक्षक को किसी तरह कमी पाए जाने पर पूरा विवरण देना होगा। सहायक आयुक्त को स्वीकृत आवेदनों में 10 फीसदी की रैंडम जांच करनी होगी। भौतिक सत्यापन के दौरान कमियां पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त करने अथवा औषधि निरीक्षक की आपत्ति से संतुष्ट नहीं होने पर जरूरी कमियां दूर कराएंगे। फिर लाइसेंस जारी किया जाएगा।
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