लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक आरके त्रिपाठी के निर्देशन में दो रोजगार मेले लगाए गए। इन मेलों में क्रमशः 204 व 120 पदों के लिए भर्तियां निकाली गईं। कुल 324 पदों के सापेक्ष सिर्फ 111 आवेदन आए। अधिकारी बताते हैं कि पदों की संख्या इसलिए अधिक रखी गई, ताकि आगे छंटनी होने तक 102 रिक्त पदों के अनुसार ड्राइवर मिल सकें।
प्रदेशभर में ड्राइवरों के अभाव में 2,400 से अधिक बसें प्रतिदिन खड़ी रहती हैं। इसमें लखनऊ परिक्षेत्र में औसतन 150 बसें डिपो में रहती हैं, जो चालकों, मरम्मत के अभाव में सड़कों पर नहीं उतर पातीं। इससे प्रतिमाह 5,40,000 यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति साधारण बसों की है, जबकि दो सौ लग्जरी बसें भी ड्राइवरों के अभाव में नहीं चल पातीं।
लखनऊ के साथ हरदोई, मुरादाबाद, आगरा की स्थिति भी खराब है। यहां भी एक भी ड्राइवर नहीं मिला है। मुरादाबाद में 332 पद रिक्त हैं। ऐसे ही हरदोई में 86, आगरा में 237 पद खाली हैं, लेकिन मिलने वाले चालकों की संख्या शून्य है, जबकि गाजियाबाद में 278 पदों के सापेक्ष 225, गोरखपुर में 257 पदों के सापेक्ष 135, अयोध्या में 270 पदों के सापेक्ष 121 चालकों की भर्ती हुई है।