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यूपी: रोडवेज बसों में ड्राइवरों की कमी से जूझ रहा है विभाग, 150 बसें डिपों में रहती हैं खड़ी; ये है वजह

Sun, 14 Dec 2025 09:09 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Roadways Bus Driver: यूपी रोडवेज बसों के ड्राइवर की कमी से जूझ रहा है। बस चलाने वालों की कमी लगातार बीते कुछ समय से बनी हुई है। 
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यूपी रोडवेज बस में ड्राइवरों की कमी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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रोडवेज लखनऊ परिक्षेत्र में बसों को चलाने के लिए ड्राइवर नहीं मिल रहे हैं। चालकों के अभाव में बसें डिपो में खड़ी हैं। यात्री सड़कों पर परेशान हैं। हाल यह है कि 102 ड्राइवरों की आवश्यकता है, लेकिन रोजगार मेलों के बावजूद एक भी चालक ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया।

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बदहाली की यह स्थिति उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में चालक भर्ती को लेकर तैयार की गई हालिया रिपोर्ट में सामने आई है। प्रदेशभर में रोडवेज के 20 परिक्षेत्र हैं। इन परिक्षेत्रों में 11,129 बसें चलती हैं। इसके लिए 19,564 ड्राइवर हैं, लेकिन प्रतिदिन औसतन ढाई हजार बसें चालकों के अभाव में नहीं चल पा रही हैं। ऐसे में संविदा चालकों की भर्ती के लिए पूरे साल अलग-अलग परिक्षेत्रों में रोजगार मेले लगाए गए, जहां अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। अब इसकी रिपोर्ट जारी हुई है, जिसमें लखनऊ की स्थिति बदहाल पाई गई है।

लखनऊ में 594 बसें और 1181 चालक हैं, जबकि 102 चालकों की जरूरत है। इसके लिए पहले टेस्ट में 36 व दूसरे में एक भी ड्राइवर नहीं आया। कार्यभार ग्रहण करने वाले चालकों की संख्या शून्य रही। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेशभर में 3,243 संविदा चालकों की आवश्यकता है। इसमें अभी तक सिर्फ 684 ने ही कार्यभार ग्रहण किया है, जबकि पहले टेस्ट में 1,806 व दूसरे में 937 अभ्यर्थी पास हुए थे। चालकों के नहीं मिलने से अधिकारियों को नए सिरे से मंथन करना पड़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि अगले वर्ष रोजगार मेलों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

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324 पदों पर निकली थी भर्ती, फिर भी खाली हाथ

लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक आरके त्रिपाठी के निर्देशन में दो रोजगार मेले लगाए गए। इन मेलों में क्रमशः 204 व 120 पदों के लिए भर्तियां निकाली गईं। कुल 324 पदों के सापेक्ष सिर्फ 111 आवेदन आए। अधिकारी बताते हैं कि पदों की संख्या इसलिए अधिक रखी गई, ताकि आगे छंटनी होने तक 102 रिक्त पदों के अनुसार ड्राइवर मिल सकें।

150 बसें चालकों के अभाव में रहती हैं खड़ी

यूपी रोडवेज। - फोटो : अमर उजाला।
प्रदेशभर में ड्राइवरों के अभाव में 2,400 से अधिक बसें प्रतिदिन खड़ी रहती हैं। इसमें लखनऊ परिक्षेत्र में औसतन 150 बसें डिपो में रहती हैं, जो चालकों, मरम्मत के अभाव में सड़कों पर नहीं उतर पातीं। इससे प्रतिमाह 5,40,000 यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति साधारण बसों की है, जबकि दो सौ लग्जरी बसें भी ड्राइवरों के अभाव में नहीं चल पातीं।

यह है जिलों की स्थिति

लखनऊ के साथ हरदोई, मुरादाबाद, आगरा की स्थिति भी खराब है। यहां भी एक भी ड्राइवर नहीं मिला है। मुरादाबाद में 332 पद रिक्त हैं। ऐसे ही हरदोई में 86, आगरा में 237 पद खाली हैं, लेकिन मिलने वाले चालकों की संख्या शून्य है, जबकि गाजियाबाद में 278 पदों के सापेक्ष 225, गोरखपुर में 257 पदों के सापेक्ष 135, अयोध्या में 270 पदों के सापेक्ष 121 चालकों की भर्ती हुई है।

इसलिए नहीं मिल रहे चालक

-संविदाकर्मियों की समस्याओं की अफसर करते हैं अनदेखी
-ड्यूटी देने के नाम पर होने वाली वसूली
-चालान की भरपाई, वेतन से कटौती
-मदों में मिलने वाला पैसा अफसर दबा लेते हैं। मसलन, वर्दी दो साल तक नहीं मिली।
-प्राइवेट बसों में अधिक कमाई
 
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सुविधाओं की नहीं है कमी

-18,000 रुपये से अधिक है वेतन, भत्ता।
-पहली जनवरी से वेतन भी बढ़ाया जाएगा। प्रति किमी दर में परिवर्तन किया जा रहा है।
-एक करोड़ रुपये का बीमा
-दुर्घटना में मृत्यु होने पर 7.50 लाख रुपये
-घायल होने पर तत्काल 10 हजार, गंभीर घायल होने पर 25 हजार रुपये
-पांच निशुल्क यात्रा पास परिजनों को दिए जाते हैं।
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