ये हैं महापौर के निशाने पर
भाजपा पार्षद दल के उपनेता देव शर्मा, मुन्ना मिश्रा, मुख्य सचेतक मुकेश सिंह 'मोटी', सचेतक अमित चौधरी, रंजना अवस्थी, मालती यादव, कौशलेंद्र द्विवेदी, प्रतिमा तिवारी, शैलेंद्र वर्मा, राजेश सिंह 'गब्बर', नामित पार्षद अखिलेश गिरि समेत अन्य।
बंद लिफाफे में महानगर पत्र भेजा
नगर निगम में भाजपा पार्षद दल का उपनेता बनाए जाने को लेकर भी महापौर और पार्षदों के एक गुट के बीच मनमुटाव हुआ और मामला संगठन तक पहुंचा। इसके बाद 30 जुलाई को महानगर भाजपा अध्यक्ष आनंद द्विवेदी की ओर से जारी सूची में उन्हीं पार्षदों के नाम शामिल किए गए, जो महापौर विरोधी गुट के माने जाते हैं। सूची जारी करने से पहले आनंद द्विवेदी ने दिल्ली जाकर राजनाथ सिंह से मुलाकात भी की थी।
सूची जारी होने के बाद महापौर राजनाथ सिंह से मिलने दिल्ली गई। इसके बाद उनकी ओर से बृहस्पतिवार को बंद लिफाफे में महानगर भाजपा अध्यक्ष को पत्र भेजा गया है। इसकी प्रति प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, नगर विकास मंत्री और जिले प्रभारी मंत्री के अलावा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भेजी गई है।
यह लिखा है पत्र में
पत्र में पार्षदों की ओर से लिखा गया है कि मीडिया और समाचार पत्रों से पता चला है कि चार-पांच पार्षद महापौर और भाजपा को बदनाम कर रहे हैं। इन पार्षदों ने आरोप लगाया है कि उनके वार्डों में महापौर की ओर से विकास कार्य के लिए धन आवंटित नहीं किया गया, जो गलत है। बीते तीन वर्षों में ऐसा कोई वार्ड नहीं है जिसमें धन देकर काम न कराए गए हों।
पार्षद निधि को 1.50 करोड़ से 2.10 करोड़ रुपये किया गया है, ताकि किसी वार्ड में धन की कमी के कारण काम न रुके। रक्षा मंत्री और महापौर के कार्यों से सभी संतुष्ट हैं। चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में भ्रामक खबरों पर रोक लगाई जाए और तत्काल निर्णय लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। पत्र के साथ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की छायाप्रति और तीन वर्षों में सभी वार्डों में कराए गए कार्यों की चुकलेट भी संलग्न की गई है।
जानिए किसने क्या कहा
लखनऊ में महापौर सुषमा खर्कवाल की ओर से महानगर भाजपा अध्यक्ष को कथित तौर पर भेजे गए पत्र को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। महापौर सुषमा खर्कवाल ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से संगठन को कोई पत्र नहीं भेजा गया है और उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
वहीं, नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष सुशील तिवारी पम्मी ने दावा किया कि उन्होंने महापौर के पत्रवाहक के तौर पर बृहस्पतिवार को एक पत्र महानगर भाजपा अध्यक्ष को दिया है। उन्होंने कहा कि पत्र महापौर की ओर से था।
दूसरी ओर, महानगर भाजपा अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने बताया कि पार्षद सुशील तिवारी बृहस्पतिवार को बंद लिफाफे में एक पत्र देकर गए थे। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्होंने पत्र खोला और पढ़ा नहीं है। ऐसे में पत्र को लेकर महापौर और पार्टी पदाधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आ रहा है। मामले में पत्र की वास्तविकता और उसमें लिखी बातों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।