विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे हस्तक्षेप करें, जिससे प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों में बड़े पैमाने पर हो रही संविदा कर्मियों की छंटनी और रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हजारों पदों को समाप्त करने का सिलसिला बंद हो। उन्होंने कहा कि छंटनी से प्रदेश की बिजली व्यवस्था के पटरी से उतरने का खतरा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि रिस्ट्रक्चरिंग के पीछे मुख्य मकसद प्रदेश के कई शहरों की बिजली व्यवस्था फ्रेंचाइजी को देना है जबकि आगरा में फ्रेंचाइजी का प्रयोग पूरी तरह विफल हो चुका है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को विगत मई माह से हजारों की संख्या में बिना किसी मापदंड के हटाया जा चुका है। मई 2017 में पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा जारी आदेश में संविदा कर्मियों को रखे जाने के मापदंड निर्धारित किए गए हैं। इनके अनुसार शहरी क्षेत्र में विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत उपकेंद्र पर 20 कर्मचारी होने चाहिए।
समिति ने बताया कि सभी विद्युत वितरण निगमों में संविदा कर्मियों के किए जा रहे नए टेंडर में मई, 2017 के मापदंड का उल्लंघन करते हुए 27% से 45% तक संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि इसके साथ ही लखनऊ, मेरठ, अलीगढ़, बरेली, नोएडा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर हजारों नियमित पदों को समाप्त कर दिया गया है, जिससे इन शहरों में बिजली व्यवस्था को लेकर अफरातफरी मची है। बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में व्यापक जनसंपर्क कर आंदोलन को तेज करने की तैयारी की।