डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्ण कुमार यादव बताते हैं कि यह वायरस श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। जो ब्रोंकियोलाइटिस और निमोनिया का कारण बनती है। इसकी शुरुआत सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों से होती है। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के लिए यह खतरनाक होता है। उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली पूर्ण विकसित यह वायरस तेजी से फैलता है। हृदय या फेफड़े की बीमारी वाले बच्चों पर भी इसका असर घातक होता है।
लक्षण और बचाव
एसजीपीआई की न्यूनेटोलॉजी विभाग की डॉ. अनिता सिंह बताती है कि जांच का दायरा बढ़ने से आरएसवी के मामले आसानी से पकड़ में आ रहे हैं। पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बच्चों के शुरुआती लक्षणों में खांसी, सांस लेने में कठिनाई, दूध पीने में परेशानी, असामान्य रंग (पीला, बैंगनी या नीला) और बुखार मुख्य हैं। अगर घर में किसी को सर्दी-जुकाम है तो वह नवजात से दूर रहें। ऐसे मामलों में कोविड जैसी सावधानी बरतें। मास्क लगाएं और बच्चे को छूने से बचें।
गर्भावस्था के दौरान लगवा सकते हैं टीका
न्यूनेटोलॉजिस्ट डॉ. आकाश पंडिता बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान इसका टीका भी लगता है। नवजात को भी टीका लगता है लेकिन उसकी कीमत 20 से 25 हजार रुपये है। समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में घर में नवजात होने पर यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार है या हाल ही में बीमार हुआ हो, उसे शिशु से दूर रखें। शिशु को छूने या गोद में लेने से बचें।