आशा और एएनएम और समूह भी कर रहे प्रेरित
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुपोषण से बचाव के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गांवों में आशा, एएनएम और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे ग्रामीण महिलाओं को जागरुक करें। उन्हें कैल्शियम और प्रोटीन आदि का महत्व बताएं। हर दिन कम से कम एक गिलास दूध पीने के लिए प्रेरित करें।
प्रदेश के अलग- अलग हिस्से का योगदान
राज्य में कुल उत्पादन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का योगदान 50 फीसदी तक है।
- बुलंदशहर 5.0 फीसदी के साथ पहले स्थान पर है।
- पूर्वांचल में उत्पादन करीब 32 फीसदी।
- मध्य उत्तर प्रदेश करीब 14 फीसदी।
- बुंदेलखंड में उत्पादन 5 फीसदी से 7 फीसदी।
पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि दूध अमृत के समान है। इससे कुपोषण को खत्म किया जा सकता है। प्रदेश में 10 साल के अंदर उत्पादन में करीब 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। आबादी के हिसाब से उत्पादन लगातार बढा़या जा रहा है। जल्द ही हम दूध सेवन के मामले में भी पहले स्थान पर होंगे।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुंदरिका यादव ने कहा कि हर व्यक्ति के लिए दूध जरूरी है। हर महिला को हर दिन कम से कम 250 से 300 मिलीलीटर दूध का सेवन करना चाहिए। इससे हड्डियां व दांत मजबूत होते हैं। मांसपेशियों का विकास होता है। नींद अच्छी आती है। पाचन और इम्युनिटी दुरुस्त रहती है। जो महिलाएं नियमित सेवन करती हैं, उन्हें गर्भावस्था और प्रसव के दौरान भी राहत रहती है।