राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रदेश भाजपा की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता बेनी प्रसाद वर्मा के निधन से रिक्त इस सीट पर भाजपा किसे भेजती है, यह सवाल सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
भाजपा के कई नेताओं में भी इस सीट पर उम्मीदवारी के कयास लगाए जा रहे हैं। वैसे तो बेनी के अलावा अमर सिंह के निधन से उनकी भी राज्यसभा सीट रिक्त हो चुकी है । पर, बेनी के निधन से रिक्त सीट पर 24 अगस्त को उपचुनाव होना है।
राज्यसभा की चुनाव प्रक्रिया के अनुसार, उपचुनाव वाली सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार की जीत तय है। इसलिए सबसे बड़ा यह सवाल ही लोगों के बीच चर्चा में है कि भाजपा इस सीट पर प्रदेश के किसी जमीनी नेता को भेजती है अथवा दूसरे राज्य के किसी नेता को यहां से राज्यसभा भेजकर समायोजन करती है।
वर्ष 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश की राज्यसभा सीटों से दूसरे राज्यों के वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली भेजकर उनका राजनीतिक समायोजन किया जाता रहा है। इनमें मनोहर परिकर और अरुण जेटली भी शामिल रहे। यूपी से अन्य राज्यसभा सदस्यों में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और आंध्र प्रदेश के रहने वाले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हाराव प्रमुख हैं।
भाजपा ने 2014 के बाद जिन लोगों को राज्यसभा भेजा उनमें ज्यादातर नाम चौंकाने वाले रहे हैं। इनमें कुछ को अपनी जमीनी पकड़ से ज्यादा केंद्र में किसी खास प्रमुख नेता की नजदीकी के गणित से राज्यसभा का सदस्य बनने का सौभाग्य मिला तो सपा के संजय सेठ, नीरज शेखर और सुरेन्द्र सिंह नागर जैसे सदस्यों को भाजपा की राज्यसभा में विपक्ष के बहुमत की सियासी गणित गड़बड़ाने में सहयोग देने के मद्देनजर उस पार्टी से अपनी पार्टी में लाकर भेजा गया।
इसी तरह डॉ. अनिल अग्रवाल, सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजकर सियासी गणित साधा गया। ऐसे में राज्यसभा के दावेदारों में किसी खास चेहरे का अनुमान लगाना मुश्किल हो रहा है।
प्रदेश भाजपा के रणनीतिकार भी इस मामले में फिलहाल कोई संकेत देने की स्थिति में नहीं दिखते। इनका भी यही कहना है कि दिल्ली जिसे तय करे। इनके अनुसार, वैसे दिल्ली की राजनीति में फिलहाल संबित पात्रा और शाहनवाज हुसैन का राजनीतिक समायोजन होना बाकी है।
पर, रणनीतिकारों का यह भी तर्क है कि शाहनवाज को यदि राज्यसभा भेजना होता तो पिछले दिनों बिहार की राज्यसभा सीट से भेज दिया जाता। जहां तक प्रदेश के भाजपा नेताओं पर नजर दौड़ाएं तो इस समय प्रदेश में जिस तरह ब्राह्मण राजनीति गरमाई है, उसके मद्देनजर एक सीट पर किसी ब्राह्मण को भी भेजा जा सकता है। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी या वाराणसी व आसपास का कोई नाम हो सकता है।