बारिश से कमजोर हुई गेहूं की सरकारी खरीद।
प्रदेश में बारिश के चलते गेहूं खरीद की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। मौसम साफ होने पर इसके फिर बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, विभाग का दावा है कि उनके पास गेहूं खरीदने के लिए पर्याप्त बोरे हैं। कहीं भी बोरों की कोई कमी नहीं है।
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अब तक 8 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा की खरीद हो चुकी है। सामान्य दिनों में औसतन 60 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन खरीद हो रही थी, जो पिछले तीन-चार दिन हुई बारिश के चलते गिरकर 40 हजार मीट्रिक टन पर आ गई है। केंद्र सरकार ने यूपी को 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य दिया है। हालांकि, प्रदेश सरकार ने अपने स्तर से 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदेगी।
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खुले मार्केट में गेहूं का रेट लगातार बढ़ रहा है। इसलिए अब किसान बेचने के बजाय गेहूं कुछ समय अपने पास रखने में ज्यादा रुचि ले रहा है, ताकि उसे बेहतर दाम मिल सकें।
पिछले दिनों विपक्ष की ओर से आरोप लगे थे कि गेहूं खरीद केंद्रों पर बोरे ही नहीं हैं, इसलिए गेहूं खरीद प्रभावित हो रही है।
प्रमुख सचिव, खाद्य एवं रसद विभाग रणवीर प्रसाद ने कहा कि 15 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने के लिए बोरे पहले से थे और इतना ही गेहूं खरीदने के लिए बोरों की आपूर्ति सात दिन के भीतर हो जाएगी। इस तरह से प्रदेश में 25 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदने के लिए बोरे वर्तमान में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी जिले में बोरों की कमी नहीं है।