उत्तर प्रदेश में संशोधित वितरण क्षेत्र सुधार योजना (आरडीएसएस) और स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की कार्यक्षमता में साफ सुधार देखने को मिल रहा है। इसकी वजह से अब उपभोक्ताओं को जरूरत के अनुसार बिजली मिल पा रही है। प्रदेश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार कम हुआ है। वित्त वर्ष 2022-23 में जहां बिजली की कुल मांग करीब 14,425 करोड़ यूनिट थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 16,478 करोड़ यूनिट हो गई। यह सुधार आरडीएसएस योजना के तहत पुरानी और जर्जर बिजली लाइनों को बदलने, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने से संभव हुआ है। इन कदमों से बिजली चोरी पर रोक लगी है और तकनीकी नुकसान भी घटा है।