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यूपी: बिजली के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन जारी, सीएम योगी से दखल देने की मांग; क्या सस्ती होगी बिजली?

Sun, 08 Feb 2026 09:17 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Electricity rates in UP: यूपी में बिजली के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। इस बीच कर्मचारियों ने इस मामले में सीएम से दखल देने की अपील की है। 
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यूपी में बिजली व्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन जारी है। अभियंताओं एवं कर्मचारियों ने शनिवार को प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की। समिति पदाधिकारियों ने क हा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा नियमित कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं के विरुद्ध लगातार उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है। इससे कर्मचारियों मे आक्रोश है।

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पांच साल तक 10 फीसदी कम की जाएं बिजली दरें- वर्मा
 विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कार्पोरेशन बिजली दरें बढ़ाने के बजाय अगले पांच साल तक 10 फीसदी बिजली दर घटाने की रणनीति बनाए। क्योंकि विद्युत वितरण निगमों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ सरप्लस है।

विद्युत अधिनियम में स्पष्ट है कि जब तक निगमों पर उपभोक्ताओं का सरप्लस रहेगा, तब तक बिजली दरें नहीं बढ़ाई जा सकती है। इसके बाद भी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) में गैप दिखाकर बिजल दर बढ़वाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का पहले से 33122 करोड़ सरप्लस चल रहा है। वर्ष 2025-26 में भी लगभग 18,592 करोड़ सरप्लस हुआ है। ऐसे में कुल सरप्लस 51 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। परिषद अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार से मांग की कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत 51 हजार करोड़ सरप्लस को आधार बनाकर बिजली दरों में कमी का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग में भेजें। उन्होंने सरकार से अपील की कि बिजली दरें कम कराने का प्रस्ताव देकर विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उपभोक्ताओं को उसका हक दिलाने की दिशा में पहल करें।

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आरडीएसएस और स्मार्ट मीटर से बिजली व्यवस्था में सुधार

उत्तर प्रदेश में संशोधित वितरण क्षेत्र सुधार योजना (आरडीएसएस) और स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की कार्यक्षमता में साफ सुधार देखने को मिल रहा है। इसकी वजह से अब उपभोक्ताओं को जरूरत के अनुसार बिजली मिल पा रही है। प्रदेश में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर लगातार कम हुआ है। वित्त वर्ष 2022-23 में जहां बिजली की कुल मांग करीब 14,425 करोड़ यूनिट थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 16,478 करोड़ यूनिट हो गई। यह सुधार आरडीएसएस योजना के तहत पुरानी और जर्जर बिजली लाइनों को बदलने, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने और बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने से संभव हुआ है। इन कदमों से बिजली चोरी पर रोक लगी है और तकनीकी नुकसान भी घटा है।
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