कोडीन युक्त कफ सिरप कांड के बाद एफएसडीए ने थोक दवा प्रतिष्ठानों की जीओ टैगिंग और लाइसेंस प्रणाली सख्त करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। बल्क सप्लाई की निगरानी के लिए केंद्र से दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। अवैध बिक्री मामले में अब तक 36 जिलों में कार्रवाई हो चुकी है।
कोडीन युक्त कफ सिरप कांड के बाद एफएसडीए ने शासन को एक प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में दवा के थोक प्रतिष्ठानों की जीओ टैगिंग और लाइसेंस प्रणाली को सख्त करने को कहा गया है। केंद्र सरकार कोडीन युक्त काफ सिरप की बल्क सप्लाई और बिक्री की निगरानी के लिए दिशा निर्देश जारी करे इसको भी प्रस्ताव में प्रमुखता से बताया गया है।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर भेजे गए प्रस्ताव में बताया गया है कि थोक औषधि विक्रय लाइसेंस प्रणाली को पारदर्शी व सख्त करने की जरूरत है। प्रतिष्ठानों की भंडारण क्षमता से लेकर खरीद-फरोख्त का पूरा विवरण फोटो-वीडियो के साथ होना चाहिए। इसको लेकर कड़े नियम बनाने बेहद जरूरी हैं। प्रतिष्ठान के टेक्निकल पर्सन का अनुभव प्रमाण ड्रग इंस्पेक्टर सत्यापन करे, इसका प्रावधान बेहद जरूरी बताया गया है।
इसलिए जरूरी हैं सख्त नियम-कानून
कोडीन युक्त कफ सिरप मामले की जांच में खुलासा हुआ था कि फर्में विक्रय बिल पेश नहीं कर सकीं। फर्जीवाड़ा करने वाले फर्में केवल कागजी कागजों में सिरप का क्रय-विक्रय दर्शाती रहीं। किसी भी फुटकर औषधि प्रतिष्ठान को कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई करने का कोई साक्ष्य नहीं मिला। वर्ष 2024-25 प्रदेश में इस सिरप की सप्लाई वास्तविक चिकित्सीय जरूरत से कई गुना अधिक की गई। इसलिए लाइसेंस प्रणाली से लेकर इस सिरप की बिक्री व निगरानी के लिए सख्त नियम-कानून बनाने की जरूर है।
बड़े पैमाने पर हो चुकी है कार्रवाई, जारी है जांच
कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री व फर्जीवाड़े मामले में बड़े पैमाने पर कार्रवाई हो चुकी है। प्रदेश के 36 जिलों में सिरप को अवैध तरीके से बेचे जाने की पुष्टि हुई। 161 फर्मों पर केस दर्ज हुए। जांच में सामने आया है कि सात सौ करोड़ से अधिक संदिग्ध आपूर्ति की गई। जांच समिति तफ्तीश कर रही है। सिंडीकेट का दायरा बढ़ता जा रहा है। 79 केस दर्ज हो चुके हैं और 85 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।