नियामक प्राधिकरण के अध्यक्ष डीएम होंगे। सदस्य के रूप में एससपी/एसपी/पुलिस आयुक्त द्वारा नामित अधिकारी, नगर आयुक्त व सचिव, विकास प्राधिकरण के अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत के सचिव, संबंधित तहसील के एसडीएम व पुलिस क्षेत्राधिकारी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन), सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी व अध्यक्ष द्वारा नामित कोई विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे। नीति के तहत स्टेज कैरिज बस अड्डा, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज व ऑल इंडिया टूरिस्ट बस पार्क के स्वामित्व का हस्तांतरण किसी विधिक इकाई को किया जा सकता है। नीति के तहत नियामक प्राधिकारी को बस अड्डे के संचालक को सुनवाई का अवसर देने के बाद कतिपय स्थितियों में उनको निर्गत प्राधिकार पत्र के निलंबन अथवा निरस्तीकरण का अधिकार होगा। नियामक प्राधिकारी के किसी आदेश से संतुष्ट न होने पर बस अड्डा संचालक अपीलीय प्राधिकारी के रूप में मंडलायुक्त के समक्ष अपील कर सकेगा।
प्रदेश में अभी निजी स्टेज कैरिज बस एवं कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बस के लिए अड्डों अथवा पार्क नहीं हैं। ऐसे में निजी बसें सड़कों पर अथवा सार्वजनिक स्थानों पर खड़ी होती हैं। वहीं, परिवहन निगम के बस अड्डों पर बसों की संख्या के अनुरूप पर्याप्त पार्किंग न होने से रोडवेज बसें भी सड़कों पर खड़ी होती हैं। बस पार्क बनने से ऐसी समस्याएं खत्म होंगी।