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यूपी: बिजली बिल के विरोध में देशव्यापी आंदोलन की तैयारी, 10 मार्च को संसद में पेश होने की संभावना

Fri, 06 Mar 2026 09:37 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Electricity bill in UP: राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से बिजली दरों में कमी कराने की मांग की है। ऐसा होने से बिजली का बिल कम होने की संभावना है। 
 
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यूपी में बिजली कर्मचारियों का आंदोलन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईईई) की शुक्रवार को हुई ऑनलाइन बैठक में तय किया गया कि बिजली (संशोधन) बिल 2025 के संसद में पेश होते ही बिजली कर्मी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।

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बैठक की अध्यक्षता कर रहे एनसीसीओईईई के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार 10 मार्च को संसद में इस बिल को पेश कर सकती है। ऐसे में सभी अभियंताओं और बिजली कर्मियों को तैयार रहना होगा। संसद में पेश किए जाने वाले बिल के विरोध में कार्य बहिष्कार किया जाएगा। शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि जिस संगठन ने पहले ही इस बिल का समर्थन कर दिया है, उसे ही कानून को अंतिम रूप देने वाले वर्किंग ग्रुप में शामिल करना पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक बनाता है। बैठक में पी. रत्नाकर राव, आरके त्रिवेदी, मोहन शर्मा, कृष्णा, आदि शामिल थे।

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बिजली दरों में कमी के लिए आयोग को निर्देश देने की मांग

 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से बिजली दरों में कमी कराने की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस निकल रहा है, इसलिए बिजली दरें कम की जानी चाहिए।

प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए नई बिजली दरों का प्रस्ताव दिया है, जिस पर सुनवाई प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस क्रम में 9 मार्च को नोएडा में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को विद्युत अधिनियम 2003 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए राज्य विद्युत नियामक आयोग को दरें कम करने के निर्देश देने चाहिए।

उन्होंने कहा कि बिजली दरों में कमी से प्रदेश के करीब 3.72 करोड़ उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। परिषद का आरोप है कि बिजली कंपनियां 2026–27 के लिए लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का घाटा दिखाकर दरें बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि उपभोक्ताओं का इतना बड़ा सरप्लस अभी भी कंपनियों पर बकाया है।

वर्मा ने यह भी कहा कि प्रदेश के उपभोक्ता पूरा बिजली बिल जमा करते हैं, लेकिन खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें 24 घंटे के बजाय करीब 18 घंटे ही बिजली मिल पाती है। उनके अनुसार कानून के तहत सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए।
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