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UP: पीपी चौधरी बोले-'एक देश-एक चुनाव' से लोकतंत्र होगा मजबूत, अर्थव्यवस्था को सात लाख करोड़ का फायदा होगा

Wed, 15 Jul 2026 03:51 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लोकतंत्र को मजबूत करेगी और देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर कई समितियां पहले भी सिफारिश कर चुकी हैं। प्रस्तावित व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और राजनीतिक स्थिरता बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
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भाजपा सांसद पीपी चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष एवं सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि 'एक देश-एक चुनाव' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच है और इसका उद्देश्य लोकतंत्र को अधिक मजबूत, प्रभावी तथा देशहित के अनुरूप बनाना है। उन्होंने कहा कि 1952 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे, इसलिए यह व्यवस्था भारतीय संघीय ढांचे के खिलाफ नहीं है।

यह व्यवस्था पूरी तरह से बदल गई

प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि 1968 में कांग्रेस शासन के दौरान राष्ट्रपति शासन और कुछ राज्यों के पुनर्गठन के कारण चुनावों का कैलेंडर प्रभावित हुआ। बाद में आपातकाल के दौरान लोकसभा का कार्यकाल बढ़ने से यह व्यवस्था पूरी तरह से बदल गई। 1983 में चुनाव आयोग, 2002 की समिति, 2015 की नीतिगत समिति, 2018 में नीति आयोग और 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश कर चुकी हैं।

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पीपी चौधरी ने कहा, 'वन नेशन, वन इलेक्शन' केवल चुनावों का एक समान समय निर्धारण है, इससे संविधान के मूल ढांचे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनका दावा था कि इस व्यवस्था से देश की अर्थव्यवस्था को करीब सात लाख करोड़ रुपये का लाभ होगा। बार-बार चुनाव होने से बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गृह राज्यों में लौट जाते हैं, जिससे उद्योग, शिक्षा और विकास कार्य प्रभावित होते हैं।

अब तक सकारात्मक अनुभव मिले

उन्होंने कहा कि समिति देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर सभी पक्षों की राय ले रही है और अब तक सकारात्मक अनुभव मिले हैं। यदि संसद से विधेयक पारित होता है तो वर्ष 2029 से चरणबद्ध तरीके से कई राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं। समिति सरकारों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव के साथ रचनात्मक विश्वास प्रस्ताव (Constructive Vote of Confidence) जैसे प्रावधानों पर भी विचार कर रही है।

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