प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर मामले में पावर कार्पोरेशन बैकफुट पर आ गया है। आयोग को भेजे गए जवाब में कहा कि अभी कीमत वसूलने की अंतरिम व्यवस्था है। आगे से आयोग द्वारा तय किए गए मानकों के हिसाब से ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। कार्पोरेशन ने अपने जवाब में यह भी कहा कि वह आयोग में 10 बार प्रस्ताव भेज चुका है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने शुक्रवार को पावर कार्पोरेशन के जवाब को गलत ठहराते हुए नियामक आयोग में एक नया कानूनी प्रस्ताव दाखिल किया, जिसमें मांग की कि नियामक आयोग हर हाल में पावर कार्पोरेशन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करे।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग को सौंपे कानूनी प्रस्ताव (लीगल प्रपोजल) में कहा कि नोटिस के जवाब में पावर कार्पोरेशन अंतरिम आदेश होने की दुहाई दे रहा है। वह अपने जवाब में केवल बिना अनुमोदन के हो रही वसूली को जायज ठहरा रहा है। कास्ट डाटा बुक आयोग से अनुमोदित नहीं होने की बात कही गई है। फिर भी उपभोक्ताओं से मनमाने ढंग से 6016 वसूले जा रहे हैं।
कार्पोरेशन यह भी दुहाई दे रहा है कि वह 10 बार कॉस्ट डाटा बुक का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अनुमोदित नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उसके गलत प्रस्ताव को बार-बार भेजने पर स्वीकार किया जाना चाहिए? परिषद ने कार्पोरेशन के प्रस्ताव की खामियां गिनाते हुए कहा कि आयोग में आए प्रस्ताव में जीएसटी की दरें दोगुनी भेजी गईं। कुछ सामग्री में कई गुना वृद्धि करके दर्शाया गया।
परिषद ने इन कमियों को उजागर किया है। कार्पोरेशन ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत निकाली जाए तो वह 7000 से 9000 के बीच होगी। ऐसे में परिषद ने कहा कि राजस्थान में 2500 रुपये में स्मार्ट प्रीपेड मीटर कैसे लगाया जा रहा है।