राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में पोस्टमार्टम की व्यवस्था को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य फॉरेंसिक मेडिसिन की पढ़ाई को बेहतर बनाना है। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष द्वारा जारी निर्देश के अनुसार अब लखनऊ समेत यूपी के सरकारी, स्वायत्तशासी और निजी मेडिकल कॉलेज तय शर्तों पर पोस्टमार्टम प्रक्रिया में शामिल होंगे। हालांकि निजी कॉलेजों को केवल लावारिस शव ही दिए जाएंगे। गंभीर अपराधों या मेडिकल बोर्ड से जुड़े मामलों के शव निजी कॉलेजों को नहीं भेजे जाएंगे।
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सरकारी संस्थानों जैसे केजीएमयू, राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, एसजीपीजीआई और यूपी के अन्य मेडिकल विश्वविद्यालयों में पोस्टमार्टम वहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा केंद्र सरकार के संस्थानों जैसे बीएचयू, एएमयू और एम्स गोरखपुर में भी यह सुविधा रहेगी। सरकार ने साफ किया है कि पोस्टमार्टम राष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगा। रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) और संबंधित संस्थान के फोरेंसिक विभागाध्यक्ष की होगी। निजी मेडिकल कॉलेजों में पोस्टमार्टम शुरू करने से पहले उच्च स्तरीय समिति का निरीक्षण अनिवार्य होगा।