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UP: बयानों में एक शब्द की हेरफेर नहीं कर सकेगी पुलिस, डीजीपी ने जारी किए निर्देश; पासपोर्ट सत्यापन पर भी आदेश

Mon, 17 Aug 2026 08:39 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

UP DGP: यूपी डीजीपी ने विवेचना में डिजिटल साक्ष्यों के इस्तेमाल पर भी निर्देश दिए हैं। तलाशी, जब्ती, निरीक्षण और अन्य कार्रवाई के दौरान तैयार डिजिटल साक्ष्य ई-साक्ष्य एप पर अपलोड होंगे। 
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यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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विवेचना के दौरान अब पुलिस गवाहों के बयानों में अपनी ओर से शब्द नहीं डाल सकेगी। डीजीपी राजीव कृष्णा ने इस संबंध में प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। गवाह जो बात अपनी बोली और भाषा में बताएंगे, विवेचक को उसे उसी रूप में दर्ज करना होगा। अभियुक्त के खिलाफ आरोप गढ़ने या उसे दोषी ठहराने वाले सवाल नहीं पूछे जा सकेंगे। नियमों की अनदेखी करने पर विवेचक के साथ पर्यवेक्षण अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी।

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ये निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में जारी हुए हैं। कोर्ट ने आतिश उर्फ कृष्णकांत बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई की थी। इस मामले में पीड़ित और उसकी पत्नी के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डेड बयानों में अंतर पाया गया था। विवेचक ने गवाहों के वास्तविक कथनों के बजाय अपनी ओर से कथन जोड़े थे। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को अनुचित मानते हुए डीजीपी को दिशा-निर्देश जारी करने को कहा था। डीजीपी ने थानों के विवेचकों और पुलिसकर्मियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कराने को भी कहा है। इन कार्यशालाओं में आपराधिक कानून और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।

स्पष्टीकरण के लिए ही सवाल पूछ सकेगा विवेचक
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 के तहत विवेचक सूचक सवाल नहीं पूछेंगे। इनका मकसद आरोपी के खिलाफ कोई तथ्य निकलवाना या आरोप मजबूत करना नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर किसी बात को स्पष्ट करने के लिए सवाल किया जा सकता है। हालांकि, गवाह को किसी उत्तर का सुझाव नहीं दिया जाएगा। गवाह ने जिस भाषा या बोली में घटना बताई है, बयान उसी में दर्ज होगा।
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सात साल या अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच जरूरी
डीजीपी ने विवेचना में डिजिटल साक्ष्यों के इस्तेमाल पर भी निर्देश दिए हैं। तलाशी, जब्ती, निरीक्षण और अन्य कार्रवाई के दौरान तैयार डिजिटल साक्ष्य ई-साक्ष्य एप पर अपलोड होंगे। जरूरत के अनुसार इन्हें एफआईआर से लिंक करने के भी निर्देश दिए गए हैं। सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में घटनास्थल का फॉरेंसिक विशेषज्ञों से निरीक्षण अनिवार्य होगा। इसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पासपोर्ट सत्यापन में केस छिपाया तो नपेंगे पुलिसकर्मी: डीजीपी
 पासपोर्ट के पुलिस सत्यापन में आवेदक के खिलाफ दर्ज केस की जानकारी छिपाना या गलत रिपोर्ट भेजना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ेगा। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद डीजीपी राजीव कृष्णा ने प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों, एसपी-एसएसपी और थाना प्रभारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें पासपोर्ट सत्यापन की रिपोर्ट पूरी और सही जानकारी के साथ भेजने को कहा गया है। लापरवाही मिलने पर पुलिसकर्मी के साथ जिम्मेदार अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी।

पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर रिपोर्ट भेजते समय आवेदक के खिलाफ दर्ज सभी केसों और उनकी मौजूदा स्थिति बतानी होगी। थाने के रिकॉर्ड में कोई केस दर्ज है और उसे रिपोर्ट में नहीं बताया गया तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह निर्देश जतिन कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी किए गए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत को पता चला कि पुलिस ने 15 जून 2026 को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को भेजी रिपोर्ट में आवेदक के खिलाफ केवल एक केस बताया था, जबकि वर्ष 2024 में एक और केस दर्ज हुआ था। लेकिन पुलिस ने इसे सत्यापन रिपोर्ट में नहीं बताया। हाईकोर्ट ने पुलिस की इस गलती पर नाराजगी जताई।

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