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यूपी पुलिस का ‘नंगा नाच’, घर में घुसकर महिलाओं के कपड़े फाड़े

Mon, 01 Jun 2015 01:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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विवादित भूमि पर हरे पेड़ कटवाने गए पीजीआई एसओ का विरोध कर रहे लोगों पर रविवार को पुलिस ने जमकर कहर बरपाए। यहां तक कि महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा।
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सभी की लाठी-डंडों से जमकर पीटा। घर में घुसकर महिलाओं से अभद्रता की, उनके कपड़े फाड़ डाले और मकान में आग लगा दी।

पुलिस का उत्पात देख ग्रामीण ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देते रहे, पर कोई उनकी मदद के लिए नहीं आया।

हालांकि फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचते ही पुलिसकर्मी वहां से भाग निकले। पर महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को घेरते हुए उनके बिल्ले नोंच लिए।

इस मामले में पीड़ित परिवार ने डीआईजी रेंज आरके चतुर्वेदी को शिकायती पत्र सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गुहार लगाई है।

छह साल से कोर्ट में विचाराधीन है मामला

पीजीआई के शीतलखेड़ा निवासी किसान रामनाथ ने बताया कि गांव के कोने पर उनकी दो बिसवा जमीन है। इस जमीन पर मालिकाना हक को लेकर उनका चचेरे भाई रामविलास यादव से विवाद है।

मामला छह वर्ष से कोर्ट में विचाराधीन है और इसमें यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश हैं। रामनाथ ने बताया कि रामविलास पीजीआई पुलिस से साठगांठ कर करीब 15 दिन पहले जमीन में पूर्वजों के लगाए हरे पेड़ों को कटवाने की कोशिश की थी।

इसकी भनक लगने पर रामनाथ ने विरोध किया तो पिछले शुक्रवार को एसओ पीजीआई अरविंद पांडेय कई पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंचे और अपनी निगरानी में फलदार गूलर के पेड़ को कटवाना शुरू किया।

इस पर पूरा गांव इकट्ठा हो गया। विरोध के चलते पुलिस को लौटना पड़ा। जाते-जाते एसओ ने पेड़ कटवाने के लिए ऊपर से दवाब की बात कही और समझौता करने का दबाव बनाया।

लोगों ने एनओसी मांगी तो बरसा दीं लाठियां

रामनाथ ने बताया कि रविवार सुबह करीब 11 बजे एसओ अरविंद पांडेय  पुलिस बल के साथ दोबारा उसी विवादित जमीन पर पहुंचे और पेड़ कटवाना शुरू कर दिया।

इस पर रामनाथ के परिवारवालों के साथ मिलकर ग्रामीणों ने विरोध किया। एसओ ने पेड़ कटवाने के लिए ऊपर से आदेश होने की बात कही, तो लोगों ने वन विभाग की एनओसी मांगी। इस पर पुलिस कर्मी भड़क गए।

ग्रामीणों को लाठी-डंडों से पीट-पीटकर भगाना शुरू कर दिया। रामनाथ ने बताया कि पेड़ काटने का विरोध करने पर पुलिस के उनके घर में घुसकर आग लगा दी।
 
घर में मौजूद महिलाओं से अभद्रता की और उनके कपड़े तक फाड़ डाले। महिलाओं के साथ-साथ बच्चों को भी पीटना शुरू किया तो ग्रामीणों का आक्रोश और भड़क गया।

उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी। इसके बाद भी एक घंटे तक वहां पर कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।
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फायर ब्रिगेड पहुंचते ही भाग न‌िकले

आग लगने की सूचना पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची तो पुलिस कर्मी वहां से भाग निकले। हाथापाई कर रहे कुछ दरोगा-सिपाहियों के बिल्ले महिलाओं के हाथ में ही रह गए।

इसके बाद दमकल कर्मियों ने आग बुझाई। ग्रामीणों ने पुलिस की पिटाई से घायल रामनाथ, उनकी पत्नी प्रेमा, बहू नीतू, बेटे विमल चंद और 13 वर्षीय पुत्र प्रमोद को अस्पताल पहुंचाया, जहां सभी का प्राथमिक उपचार कराया गया।

रामनाथ का आरोप है कि एसओ पीजीआई अरविंद पांडेय ने पेड़ कटवाने के लिए मुख्यमंत्री के एक ओएसडी का नाम लेकर धमका रहे हैं।

उनका कहना है कि पेड़ कटवाने के लिए ऊपर से आदेश है, भले ही इसके लिए कोई रास्ता अपनाना पड़े। रामनाथ ने आरोप लगाया कि 29 मई को एसओ ने उन्होंने फर्जी केस में फंसाकर जेल भिजवाने की धमकी दी थी। रामनाथ का चचेरा भाई सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है।
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