...अरसा बीत गया। अपनों, दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ कुछ सुकून के लम्हे बिताय। सुबह से शाम और दिन से रात...ड्यूटी और सिर्फ ड्यूटी। बच्चे कब बड़े हो गये पता ही नहीं चला।
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लेकिन, सरकार के फैसले से उम्मीद जगी है। दस दिन पर एक छुट्टी ही सही, मिलेगी तो उसे खुलकर जीने का मौका भी मिलेगा। कुछ अपने मन की करेंगे तो कुछ अपनों के मन की सुनेंगे।
घूमेंगे, फिरेंगे और स्मृतियों में कैद हो जाने वाली यादों का कारवां बनाएंगे। राज्य सरकार की ओर से पुलिस वालों को दस दिन में मिलने वाले अवकाश पर जब अमर उजाला ने शुक्रवार को उनसे बात की तो कुछ ऐसी ही भावनाएं व्यक्त हुईं। हर किसी ने सरकार का शुक्रिया अदा किया।
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परिवार को नहीं दे पाते थे वक्त
एसएसपी के पेशकार अश्वनी कुमार पांडेय की पत्नी मीनू कहती हैं कि सब इंस्पेक्टर से शादी की थी। सोचा था कि हफ्ते में कम से कम एक दिन साथ घूमेंगे। साथ खाना खाएंगे।
पता चला कि उनसे मुलाकात ही आसान नहीं है। सुबह जागते ही आनन-फानन में तैयार होकर ड्यूटी पर निकल जाना और रात दो बजे के बाद घर लौटना। बच्चे कई दिन तक उन्हें नहीं देख पाते और वह बच्चों को सोते ही पाते हैं।
अब तो दोनों बच्चे कृष्णा और पार्थ कहते हैं कि आधी रात के बाद दरोगा जी आते हैं और सवेरे चाय-नाश्ता करके चले जाते हैं। दस दिन में एक छुट्टी का पता चलते ही बच्चे बेहद खुश हैं कि एक दिन पापा से मुलाकात होगी। अश्वनी का कहना है कि परिवार की जिम्मेदारी समझते हैं लेकिन ड्यूटी से पीछे नहीं हटते।
समाज से नाता ही टूटने लगा था
परिवार के साथ अतुल श्रीवास्तव
- फोटो : amar ujala
पुलिसकर्मियों को दस दिन में एक छुट्टी की खबर से एसआई अतुल श्रीवास्तव के घर में खुशी का माहौल है। ठाकुरगंज की सतखंडा चौकी इंचार्ज अतुल श्रीवास्तव की पत्नी श्रुति अपनी आठ साल की बेटी अर्षिता के साथ राजाजीपुरम में रहती हैं।
श्रुति का कहना है कि शादी के नौ साल हो गए हैं। घर के काम, बच्ची को स्कूल ले जाना, खरीददारी में शायद ही कभी अतुल साथ गये हों।
परिवार में कोई बीमार हो या शादी-ब्याह अक्सर छुट्टी न मिलने पर यह जिम्मेदारी भी खुद ही उठाती थी। समाज से नाता टूटने लगा था। दस दिन में छुट्टी मिलने पर तमाम काम हो सकेंगे। अतुल कहत हैं कि काम के बीच कब आधी रात बीत जाती है पता ही नहीं चलता।
छुट्टी से महिला सिपाहियों में खुशी
काम निपटाने का मिलेगा मौका
- फोटो : amar ujala
एसएसपी के कैंप ऑफिस पर तैनात महिला कांस्टेबल मंजूलता श्रीवास्तव का कहना है कि दस दिन में एक छुट्टी पर घर की सफाई व नाते-रिश्तेदारों से मुलाकात का मौका मिलेगा। गृहस्थी का सामान खरीदने व अन्य कामों में कोई हड़बड़ाहट नहीं होगी।
पारा थाने में तैनात महिला कांस्टेबल संगीता सिंह, ज्योति पांडेय व कृष्णानगर की रीता दस दिन में एक छुट्टी की घोषणा पर एक साथ खुशी का इजहार कर रही थी। तीनों महिला सिपाही लगातार ड्यूटी से थकान, काम और परिवारीजनों से बढ़ती दूरी पर चर्चा में व्यस्त थीं। उन्होंने कहा कि साप्ताहिक अवकाश से बड़ी राहत मिलती है। परिवारीजनों की शिकायत दूर करने का मौका मिलेगा।
महिला थाना की कांस्टेबल रीना राज कहती हैं कि मैं गांव गई थी वापस लौटने पर मुख्यमंत्री की घोषणा का पता चला। छुट्टी मिलने की खबर से मुझे बहुत खुशी हुई है। अभी तक छुट्टी न मिलने से मैं अपने पति और बच्चे को समय नहीं दे पाती थी। मेरा एक साल का बेटा है। छुट्टी न मिलने से मेरे पति को बच्चे को संभालना पड़ता था। अब छुट्टी मिलने से बच्चे और पति के फुर्सत के कुछ पल बिता पाऊंगी।
हजरतगंज कोतवाली में तैनात कांस्टेबल अजय कुमार यादव बोले यह सुनकर खुशी तो हुई लेकिन इसे लागू भी किया जाना चाहिए। क्योंकि पहले भी इस तरह का एलान किया जा चुका है।
मेरे पिता भी पुलिस में ही हैं। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं। छुट्टी न मिल पाने के कारण डॉक्टर को नहीं दिखा पाते हैं। एक महीने पहले ही मेरी शादी हुई है। उसे भी टाइम दे पाऊंगा। माता-पिता की भी कुछ सेवा कर पाऊंगा। हम लोगों के पास कैजुअल लीव तो होती है लेकिन वह अधिकारियों की मर्जी पर निर्भर है।
छुट्टी मिलना किसे पसंद नहीं होता, सीएम के छुट्टी के ऐलान से मेरे परिवार को खासी खुशी है क्योंकि मैं अब उनके साथ अधिक समय बिता पाऊंगा। आईजी जोन के कुक दीनदयाल ने कहा मुझे भी खुशी है कि मैं अब पूरा एक दिन अपने परिवार को दे सकूंगा।
पहले छुट्टी न होने से कई सारे काम रह जाते थे जो नहीं हो पाते थे। मेरे ससुर जी का देहांत हो गया था शुक्रवार को उनकी तेरहवीं थी। छुट्टी न मिलने से तेरहवीं में नहीं जा सका।