भ्रष्टाचार व आत्महत्या के लिए उकसाने के दो अलग अलग मामलों में वांछित दो आईपीएस अफसरों को तलाशने में प्रदेश पुलिस नाकाम साबित हो रही है। इसमें एसटीएफ भी हाथ पैर मार रही है लेकिन सफलता उसे भी अब तक नहीं मिली है।
जानकारी के अनुसार पिछले जून माह में पशुपालन विभाग के नाम पर ठगी का मामला उजागर हुआ था। इसमें कई लोग गिरफ्तार हुए थे। आरोप डीआईजी अरविंद सेन पर भी लगा। अरविंद सेन पर आरोप था कि उन्होंने सीबीसीआईडी में बतौर एसपी रहते हुए पीड़ित को डराया, धमकाया और सादे पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बदले ठगों ने उन्हें मोटी रकम अदा की। मामले की जांच हुई तो आरोप सही पाए गए जिसके बाद डीआईजी अरविंद सेन को निलंबित कर दिया गया। बाद में उन्हें कोर्ट से कुछ दिनों की राहत मिली लेकिन आखिर में कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से मना कर दिया। अब पुलिस उन्हें तलाश रही है।
इसी तरह महोबा में इंद्रकांत त्रिपाठी ने एसपी मणिलाल पाटीदार पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए। आरोप लगाने के दो दिन बाद इंद्रकांत को संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लग गई। गोली लगने के पांच दिनों बाद इंद्रकांत की मौत हो गई। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने जांच में पाया कि एसपी बार-बार पैसों की मांग कर रहे थे, जिसके कारण इंद्रकांत त्रिपाठी काफी तनाव में थे और उन्होंने अपनी ही रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली थी। इस मामले में पाटीदार आरोपी बनाए गए हैं। पाटीदार को पुलिस तलाश रही है। उनके खिलाफ न्यायालय से पुलिस ने गैर जमानती वारंट भी ले लिया है। लेकिन पुलिस उन्हें अब तक तलाश करने में नाकाम साबित हुई है।