लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, आगरा, गोरखपुर और नोएडा जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ कस्बाई बाजारों में भी आभूषण कारोबार बड़ी संख्या में रोजगार देता है। सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक पहले ही ऊंचे दामों से परेशान हैं। ऐसे में खरीद टालने की अपील से बाजार में नकारात्मक संदेश गया है। एमसीएक्स में चांदी का भाव 2.77 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि खुले बाजार में यह करीब 2.17 लाख रुपये किलो बिक रही है। वहीं सोने के लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बने रहने से आम ग्राहक पहले ही सीमित खरीद कर रहे हैं।
पर्यटन और विवाह उद्योग पर भी असर
इसका सीधा संबंध पर्यटन, होटल, खानपान, आयोजन प्रबंधन और विवाह उद्योग से भी है। यूपी में भव्य शादियों, धार्मिक आयोजनों और पारिवारिक समारोहों में बड़ी मात्रा में आभूषण खरीद होते हैं। यदि लोग शादी खर्च और गहनों की खरीद टालते हैं तो पर्यटन उद्योग पर भी असर दिखाई देगा। वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज और मथुरा जैसे धार्मिक शहरों में शादी और पर्यटन आधारित कारोबार में मंदी आ सकती है।
एआईजेजीएफ ने मांग की है कि सरकार मांग दबाने के बजाय देश में मौजूद निष्क्रिय सोने को अर्थव्यवस्था में लाने की दिशा में काम करे। फेडरेशन ने विनियमित ‘बुलियन बैंक’ ढांचा बनाने का सुझाव दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा और महासचिव नितिन केडिया का कहना है कि फेडरेशन का कहना है कि घरों, मंदिरों, ट्रस्टों और स्वर्ण विनिमय कोषों में पड़ा सोना यदि नियंत्रित व्यवस्था के तहत ज्वैलर्स और निर्माताओं तक पहुंचे तो आयात निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। संगठन का दावा है कि सही नीति बनने पर भारत सालाना 200 से 300 टन तक सोने के आयात में कमी ला सकता है।