औचित्य की यूपीईआरसी को समीक्षा करनी चाहिए
परिषद ने यह भी मांग की है कि 2016 की कास्ट डाटा बुक में लागू भार वृद्धि संबंधी व्यवस्था का तुलनात्मक परीक्षण कराया जाए। उस समय भार वृद्धि के मामले में अतिरिक्त सिक्योरिटी के लिए केवल वर्तमान दर के आधार पर देय अतिरिक्त जमानत राशि ही जमा कराई जाती थी, जबकि पुराने भार के लिए पहले से जमा जमानत राशि को दोबारा वर्तमान दर पर नहीं आंका जाता था। इसलिए वर्तमान व्यवस्था में पुराने भार की पूरी सिक्योरिटी को वर्तमान दर से दोबारा गणना कर अतिरिक्त राशि मांगने के औचित्य की यूपीईआरसी को समीक्षा करनी चाहिए।
अवधेश वर्मा ने कहा कि कास्ट डाटा बुक में निर्धारित दरों को सप्लाई कोड के मूल प्रावधानों के अनुरूप ही लागू किया जाना चाहिए। यदि किसी प्रावधान की व्याख्या से पहले से जमा जमानत राशि का लाभ समाप्त होता है और पुराने भार पर दोबारा वर्तमान दर लागू होती है, तो आयोग को तत्काल स्पष्ट संशोधन, दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
परिषद ने आयोग से मांग की है कि भार वृद्धि के प्रत्येक मामले में पुराना स्वीकृत भार, नया भार, वास्तविक अतिरिक्त भार, पहले से जमा जमानत राशि, लागू वर्तमान दर और अतिरिक्त देय सिक्योरिटी अलग-अलग दिखाई जाए। साथ ही सभी बिजली कंपनियां से ऐसे मामलों का विवरण लेकर जांच कराई जाए। यदि किसी उपभोक्ता से अधिक राशि वसूल की गई है तो उसका समायोजन व रिफंड किया जाए।