हर रिटेल फार्मेसी को बनानी होगी वेबसाइट
एफएसडीए के निर्देश के मुताबिक सभी रिटेल फार्मेसियों को पब्लिक वेबसाइट बनानी होगी। इसमें फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक का नाम और परिसर का पता देना होगा। फार्मेसी या अस्पताल के फार्मासिस्ट का नाम, पंजीकरण नंबर और फोटो भी वेबसाइट पर उपलब्ध कराना होगा। स्टॉक की जानकारी हर सप्ताह अपडेट करनी होगी। वेबसाइट का यूआरएल और क्यूआर कोड फार्मेसी काउंटर पर प्रमुखता से लगाना होगा।
इसलिए व्यवस्था बदलने की कवायदएफएसडीए की हालिया जांच में अस्पतालों की 214 फार्मेसियों से मिले आंकड़ों में 130 दवाओं का विश्लेषण किया गया। इनमें 36 दवाओं की एमआरपी खरीद कीमत से 10 गुने से ज्यादा थी। कुछ मामलों में अंतर 67 गुना तक मिला। मसलन, पॉलिमिक्सिन-बी इंजेक्शन की खरीद कीमत 74.09 रुपये और एमआरपी 4,980.94 रुपये मिली।
विभाग के मुताबिक, कई मामलों में निर्माता, मार्केटिंग फर्म और स्टॉकिस्ट अस्पतालों को एमआरपी से काफी कम दर पर दवाएं उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन मरीजों तक इस छूट का पूरा लाभ पहुंचने पर सवाल उठे। इसी वजह से खरीद और बिक्री कीमत सार्वजनिक करने की व्यवस्था की जा रही है।