स्टेट जीएसटी के बाद सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले आबकारी विभाग में निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए नीति लाई जाएगी। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में आबकारी विभाग को 71,278 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया है, जो वर्तमान वित्तीय वर्ष से करीब 8 हजार करोड़ रुपये अधिक है। इस लक्ष्य को पाने के लिए देश में पहली बार यूपी आबकारी निर्यात नीति लाई जाएगी़, आबकारी निवेशक शिखर सम्मेलन भी कराया जाएगा। विभाग ने बीते दिनों एक निवेशक सम्मेलन कराया भी था, जिसमें देश की कई शराब कंपनियां और संगठन शामिल हुए थे।
नई आबकारी नीति में खासकर सिंगल मॉल्ट स्कॉच का उत्पादन करने और उसे निर्यात करने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। विदेशियों को यूपी में बनी सिंगल मॉल्ट शराब का स्वाद चखाने के लिए करीब आधा दर्जन कंपनियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में केवल दो कंपनियों रेडिको खेतान और मोहन मीकिंस की बनाई सिंगल मॉल्ट शराब विदेश भेजी जाती है। रेडिको के दो ब्रांड विदेश में लोकप्रिय भी हैं। वह अपने प्लांट की क्षमता बढ़ा भी रहा है। तीन अन्य कंपनियों ने इसमें रुचि दर्शाई है। मोदीनगर में मोदी इल्वा, मुजफ्फरनगर में इंडो स्प्रिट और लखीमपुर खीरी में ग्लोबस स्प्रिट भी सिंगल मॉल्ट शराब का उत्पादन शुरू करने वाली हैं।
विभाग वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति में यूपी में बनी शराब के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए कई सहूलियतें भी देने जा रहा है। यूरोपियन यूनियन से हुए समझौते के बाद जहां विदेशी शराब यूपी के बाजारों में उपलब्ध होगी, वहीं यूपी में बनी शराब यूरोप के 10 से ज्यादा देशों में भेजी जाएगी। हालांकि, विदेशी शराब आने के बाद बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।