संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट ‘ज्ञानभारतम्’ पर अब दर्शक प्रदेश की पांच लाख से अधिक पांडुलिपियों को देख सकेंगे। इनमें रामायण, महाभारत, विष्णु पुराण और रामचरितमानस जैसे प्रमुख ग्रंथ शामिल हैं। काजल की स्याही और वृक्षों के गोंद से लिखी गई इन पांडुलिपियों को डिजिटल माध्यम से संरक्षित किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत देशभर में दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है।
इसके लिए ‘ज्ञानभारतम्’ नाम से पोर्टल विकसित किया गया है, जहां चरणबद्ध तरीके से पांडुलिपियों को अपलोड किया जाएगा।
प्रदेश में अब तक 5.30 लाख पांडुलिपियों की खोज की जा चुकी है। सर्वेक्षण अभियान 15 जून तक चलेगा। इसके तहत आम लोग भी 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित ग्रंथ वेबसाइट पर अपलोड कर सकेंगे।
राजकीय अभिलेखागार के 77वें स्थापना दिवस पर बुधवार को विशेष पांडुलिपि प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। प्रदर्शनी में 200 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां प्रदर्शित होंगी। दर्शक हाथ से तैयार ब्रज चौरासी कोस का मानचित्र भी देख सकेंगे, जिसकी चमक सौ वर्ष बाद भी बरकरार है। प्रदर्शनी में मथुरा तीर्थ, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग और उनके 100 से अधिक नामों का उल्लेख भी शामिल है।
स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर विशेष मंथन भी आयोजित होगा। इसमें पाली एवं बौद्ध अध्ययन, पांडुलिपियों की उपयोगिता और अभिलेख संरक्षण की तकनीकों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही अभिलेखों की मरम्मत, संरक्षण के कारणों और उपचार संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी भी विशेषज्ञ देंगे।