गामा किरणें एक तरह की विद्युत चुम्बकीय विकिरण या फोटान हैं, जो परमाणु नाभिक के रेडियो सक्रियता से उत्पन्न होती हैं। ये ऊर्जा उपकरण से होकर गुजरती हैं। ये किरणें रोग फैलाने वाले कारको को नष्ट कर देती हैं। मनुष्यों में इन किरणों का प्रयोग कैंसर ट्यूमर को हटाने के लिए किया जाता है। लखनऊ स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में न्यूरो सर्जरी के लिए गामा नाइफ खरीद की प्रक्रिया चल रही है।
फल व सब्जियों पर कैसे होता है प्रयोग
निजी कंपनी में गामा रेडिएशन की निगरानी में लगे मनीष गौर ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र , हरियाणा और दक्षिण के कई राज्यों में गामा रेडिएशन प्लांट बने हैं। उदाहरण के आलू या आम को लें तो इसे पहले ट्रक से प्लांट में लाया जाता है। यहां विशेष तरह के बाक्स में डाला जाता है। फिर उसे मशीन के जरिए गामा किरणें दी जाती हैं। इससे न सिर्फ सड़न पैदा करने वाले फंगस व बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं बल्कि अंकुरण की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। फल या सब्जी को लंबे समय तक रखा जा सकता है। उनके स्वाद और गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सेहत पर नहीं पड़ेगा असर
केजीएमयू के प्रोफेसर सुधीर सिंह ने बताया कि गामा रेडिशन का असर सक्रिय डीएनए पर पड़ता है। लो डोज रेडिएशन देने से फंगस और बैक्टीरिया के डीएनए नष्ट होंगे, लेकिन फल व सब्जी पर इसका कोई असर नहीं होगा। उसकी गुणवत्ता बढेगी। उसे लंबे समय तक रखा जा सकेगा। खाद्यान अपशिष्ट कम होगा।