केजीएमयू के संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि ह्यूमरल और सेलुलर प्रतिरक्षा (एंटीबॉडी) शरीर की दो मुख्य प्रतिरक्षा प्रणाली हैं। ये शरीर को रोगजनक और अन्य खतरों से बचाने के लिए एक साथ काम करती हैं। ह्यूमरल प्रतिरक्षा एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए बी कोशिकाओं पर निर्भर करती है। सेलुलर प्रतिरक्षा वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए टी कोशिकाओं के माध्यम से एंटीबॉडी को सक्रिय करती हैं। वायरस को खत्म करने के लिए बी कोशिकाओं को उसके ऊपर चिपकना पड़ता है। वहीं, सी कोशिकाएं वायरस या बैक्टीरिया को लंबे समय तक उसके संपर्क में आते ही खत्म करती रहती हैं।
अध्ययन में शामिल लोगों ने कोवीशील्ड और कोवॉक्सीन लगवाई थी। जांच करने पर दोनों में एंटीबॉडी का स्तर समान मिला। इससे साफ है कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपने कौन सी वैक्सीन लगवाई थी।
अध्ययन में ये रहे शामिल
केजीएमयू से डॉ. गीता यादव, डॉ. डी हिमांशु, डॉ. हरदीप सिंह मल्होत्रा, डॉ. अमिता जैन, डॉ. श्रुति रडेरा, डॉ. अनिल कुमार वर्मा, डॉ .शैलेंद्र यादव, डॉ. नीरज कुमार। इसके अलावा स्वास्थ विभाग के राज्य सर्विलांस अधिकारी विकासेंदु अग्रवाल। कनाडा की मैनिटोबा यूनिवर्सिटी से रवि प्रकाश, उत्तर प्रदेश टेक्निकल सपोर्ट यूनिट से जॉन एंथोनी, परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय से अनुज त्रिपाठी।