जियारत के लिए राजधानी से ईरान और इराक गए सैकड़ों जायरीन की रातें खौफ के साये में बीत रही हैं। अनहोनी की आशंका उनके दिल की धड़कनें तेज कर रही हैं। सभी वतन वापस के लिए बेकरार हैं। जियारत पूरी हो चुकी है। अब रुपये और दवाएं भी खत्म होने को हैं।
गोलागंज निवासी सैयद मोहम्मद अली काजमी अपने माता-पिता, पत्नी पत्नी, बहन और एक बच्चे के साथ 29 मई को जियारत पर रवाना हुए थे। मौलाना कल्बे आबिद की अगुवाई में गए ग्रुप में 14 महिलाओं सहित कुल 23 जायरीन हैं। काजमी ने फोन पर बताया कि जियारत पूरी हो चुकी है। अभी वो ईरान के मशद शहर के एक होटल में रुके हुए हैं। सभी को तेहरान एयरपोर्ट से 21 जून को वापसी की फ्लाइट पकड़नी थी, लेकिन फिर वापसी का रास्ता नहीं सूझ रहा था।
काजमी ने बताया कि सोमवार को भारत मौजूद बहन ने भारतीय एंबेसी का एक लिंक व्हाट्सएप पर भेजा। लिंक में प्रोफार्मा अटैच था जिसमें हमने अपनी सारी जानकारी भर दी। मंगलवार को एंबेसी से दो बार कॉल आया। उन्होंने हमारी लोकेशन और ग्रुप के सदस्यों के बारे में जानकारी ली। भरोसा दिलाया कि तुर्कमेनिस्तान सीमा से वापसी की व्यवस्था की जा रही है। तब तक हम जहां हैं, वहीं रहने के लिए कहा गया है। इस कॉल के बाद अंधेरे में उम्मीद की रोशनी दिखाई दी है। काफी सुकून महसूस हो रहा है।
ग्रुप में लखनऊ के ये लोग हैं शामिल
मुसय्यब हुसैन, निकहत फातिमा, सैयद मोहम्मद अली काजमी, सैयद मूसा अली काजमी, ऐमन मूसवी, नुजहत फातिमा, तिलत फातिमा, अजरा खान, असगर मेहंदी खान, सैयद जफर रजा आबिदी, कल्बे आबिद खान, रियाज फातिमा, फातिमा बेगम, सैयद मोहम्मद जाकिर अली काजमी, यास्मीन मुनीर, फाजिला फातिमा काजमी, हिना नकवी, जफर अब्बास नकवी, जरीना बेगम, मंजर मसूद, शाहीन फातिमा, सामेया रिजवी, जक्को बीबी।