ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
इस्लामी शरीयत में महिलाओं को मिले उनके अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी देने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने करीब 11 महीने के बाद महिला विंग को बहाल कर दिया है। बोर्ड की महिला सदस्य मुस्लिम समाज में महंगी शादियां, दहेज के खिलाफ अभियान चलाने के साथ ही बेटियों को दहेज की जगह जायदाद में हिस्सा देने के लिए परिवारों को जागरूक करेंगी।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. कासिम रसूल इलियास ने बताया कि रविवार को बोर्ड की बैठक में महिला विंग को बहाल कर दिया गया है। पर्सनल लॉ बोर्ड में देश भर में कुल 251 सदस्य हैं, इनमें महिला सदस्यों की संख्या 30 है। बोर्ड की कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या 51 है। जिसमें चार महिला सदस्य शामिल हैं। बोर्ड की महिला विंग में एक संयोजक व पांच संयुक्त कन्वीनर होंगी। ये देश भर में महिला सदस्य बनाने का काम करेंगी। ये सदस्य इस्लामी शरीयत में मिले महिलाओं के अधिकारों व उनके कर्तव्यों के प्रति महिलाओं को जागरूक करेंगी। वे इस्लाह-ए-मआशरा, तफहीम-ए-शरीयत और कानून-ए-शरीयत की जानकारी भी देंगी।
मालूम रहे कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मार्च 2022 में महिला विंग को स्थगित कर दिया था। आरोप था कि महिला विंग की सदस्य कुछ ऐसे काम भी कर रही थीं जो पर्सनल लॉ बोर्ड के दायरे में नहीं आते हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक में हिजाब मामले को लेकर बोर्ड और उसकी महिला विंग में विवाद उत्पन्न हुआ था। बोर्ड का मानना था कि हिजाब का मामला स्थानीय स्तर पर ही निपटाया जाना चाहिए, जबकि महिला विंग इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की हिमायत में थी। विवाद बढ़ने पर बोर्ड ने महिला विंग का दायरा तय करने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। तब कमेटी ने महिला विंग को स्थगित करने की सिफारिश की थी।
पर्सनल लॉ बोर्ड का निकाहनामा करें इस्तेमाल
डॉ. कासिम ने बताया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने निकाहनामे में कुछ बदलाव कर उसे चार पेज से दो पेज का किया है। निकाहनामे में शादी के बाद शौहर और बीवी के अधिकारों के साथ ही उनके कर्तव्यों की जानकारी दी गाह पढ़ाने वाले काजी के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। बताया कि निकाहनामे में ये बिंदु भी शामिल किया गया है कि शौहर व बीवी में विवाद होने पर वो उसका निपटारा शरीयत की रोशनी में दारुलकजा या बातचीत के जरिए करेंगे। विवाद को सड़क पर लेकर नहीं जाएंगे। बोर्ड ने मुसलमानों से बोर्ड का निकाहनामा इस्तेमाल करने की अपील की है।