राज्यकर विभाग ने बाहर से आने वाले माल वाहनों के प्रदेश से होकर गुजरने पर जारी होने वाले असत्यापित प्रमाणपत्रों के मामले में कार्रवाई की तैयारी कर ली है। वर्ष 2020-21 से लेकर अब तक ऐसे मालयुक्त वाहनों का ब्योरा जुटाया जा रहा है, जो प्रदेश में प्रवेश के समय ‘परागमन प्राधिकार पत्र (टीडीएफ-1) अपलोड तो किया है, लेकिन प्रदेश के बाहर जाने से संबंधित डीटीएफ-2 अपलोड नहीं किया है। ऐसे में वाहन मालिकों द्वारा अपलोड डीडीएफ-1 असत्यापित रह गई हैं। इन मामलों में माल को प्रदेश में ही बेचा जाना मानते हुए उन पर अर्थदंड और कर निर्धारण की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल उप्र वैट अधिनियम-2008 के नियम-58 के अंर्तगत दूसरे प्रदेश से माल लेकर यूपी में प्रवेश करने के लिए मालवाहक वाहनों को विभागीय पोर्टल पर टीडीएफ-1 और प्रदेश से होकर किसी दूसरे प्रदेश में जाने के लिए टीडीएफ-2 अपलोड करने की व्यवस्था प्रभावी है। पर, तमाम ऐेसे वाहन स्वामी हैं, जिन्होंने माल लेकर प्रदेश में प्रवेश करते समय पोर्टल पर टीडीएफ-1 अपलोड करते हैं लेकिन प्रदेश से बाहर जाने के मामले में न तो टीडीएफ-2 अपलोड करते हैं और न ही संबंधित साक्ष्य ही अपलोड करते हैं। इसलिए विभाग ऐसे मामलों में यह मान लेता है कि टीडीएफ-1 अपलोड करने वाले व्यापारी ने प्रदेश में ही माल बेचा है।
विभागीय समीक्षा में तमाम ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें टीडीएफ-1 अपलोड हुए हैं लेकिन टीडीएफ-2 अपलोड नहीं किए गए हैं। ऐसे अधिकांश मामले वित्तीय वर्ष 2020-21 के हैं। इसलिए अपलोड असत्यापित टीडीएफ-1 फॉर्म से संबंधित मामलों में कर और अर्थदंड लगाने का फैसला किया है। ऐसे मामलों में कर व अर्थदंड लगाने की व्यवस्था को ऑनलाइन किया जाएगा।
इस संबंध में सभी जोन के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 व विशेष अनुसंधान शाखा, जाइंट कमिश्नर व असिस्टेंट कमिश्नर (सचल दल) और राज्यकर अधिकारियों को अपलोड सभी असत्यापित टीडीएफ-1 के मामले में नई व्यवस्था के तहत ही कर व अर्थदंड लगाने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2020-21 से अब तक के सभी मामलों में ऑनलाइन कार्रवाई करने को कहा है। अब तक यह कार्रवाई मैनुअल होती थी।