मेरठ के पाक्सो एक्ट के एक मामले में एसएसपी रोहित सिंह साजवान के साथ हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने विचार-विमर्श करते हुए इस बाबत आदेश जारी किया था। बाद में एसएसपी मेरठ ने उच्चाधिकारियों को हाईकोर्ट की मंशा से अवगत कराते हुए इस बाबत दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था।
आपराधिक मुकदमों के सूचनाकर्ता तथा ऐसे पीड़ित, जो किराए के मकान में रहते हैं, उनको अपना मकान परिवर्वित करने की सूचना पुलिस को देनी होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इस बाबत दिए गए आदेश का अनुपालन करने के लिए डीजीपी विजय कुमार ने मातहतों को पत्र लिखकर इसे सुनिश्चित कराने को कहा है। उन्होंने न्यायालय में सुनवाई के दौरान सूचनाकर्ता एवं पीड़ित की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए ये कदम उठाने को कहा है।
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बताते चलें कि मेरठ के पाक्सो एक्ट के एक मामले में एसएसपी रोहित सिंह साजवान के साथ हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने विचार-विमर्श करते हुए इस बाबत आदेश जारी किया था। बाद में एसएसपी मेरठ ने उच्चाधिकारियों को हाईकोर्ट की मंशा से अवगत कराते हुए इस बाबत दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। तत्पश्चात डीजीपी ने निर्देश जारी किए कि विवेचना के दौरान ऐसे सूचनाकर्ता एवं पीड़ित, जो किराए के मकान में रहते हैं, उनके वर्तमान पते के साथ-साथ उनके पहचान पत्र, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड लिया जाए। साथ ही, इस आशय का वचन पत्र भी लिया जाए, जिसमें अपना आवास परिवर्तित करने की दशा में उसका पता पुलिस को उपलब्ध कराएंगे। इसे प्राप्त करने के बाद विवेचना में केस डायरी के साथ संलग्न किया जाए।