पिछले दिनों समीक्षा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए नगर विकास विभाग को आय के नए स्रोत तलाशने का निर्देश दिया था, जिससे उनकी आय को बढ़ाया जा सके।
प्रदेश सरकार छोटे निकायों में लगने वाले सामान्य कर (गृह कर) और जलकर की दरों के अलावा नगर निगमों में गृहकर के दर को भी एक समान करने की तैयारी कर रही है। तृतीय राज्य वित्त आयोग और उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड की इससे संबंधित संस्तुतियां की हैं। अगर ये संस्तुतियां लागू होती हैं तो सभी नगर निकायों में गृह कर व जलकर में अंतर समाप्त हो जाएगा ।
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दरअसल पिछले दिनों समीक्षा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नगर निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए नगर विकास विभाग को आय के नए स्रोत तलाशने का निर्देश दिया था, जिससे उनकी आय को बढ़ाया जा सके। उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड ने नगर निकायों में लागू करों के दरों का अध्ययन किया तो पाया कि नगर निगमों में गृह कर वार्षिक मूल्य का 10 से 15 प्रतिशत लिया जाता है, जबकि जलकर 10.5 से 12.5 प्रतिशत लिया जा रहा है।
इसी प्रकार अध्ययन से यह तथ्य भी सामने आया है कि लखनऊ, वाराणसी और कानपुर में सर्वाधिक 15 प्रतिशत गृह कर लिया जा रहा है, जबकि बरेली, झांसी व गाजियाबाद में सबसे कम 10 प्रतिशत गृह कर है। शेष नगर निगमों में 11 से 13 प्रतिशत की दर से गृह कर लिया जा रहा है। इसी पैटर्न कर नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में भी गृह कर की दरें निर्धारित की जा रही हैं। उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड ने गृहकर व जलकर का दर एक समान करने की संस्तुति की है। कहा गया है कि इससे नगर निकायों की आय में सालाना करोड़ों रुपये की वृद्धि संभावित है।
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एकरूपता लाने के लिए 15 प्रतिशत कर लगाने की संस्तुति
उधर राज्य वित्त आयोग दो साल पहले नगर पालिका परिषदों व नगर पंचायतों में गृह कर व जलकर की दरें और नगर निगमों में गृहकर की दरों को एक समान करते हुए 15 प्रतिशत करने का सुझाव दे चुका है। उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड ने भी इस पर अपनी संस्तुति दी है। इस आधार पर नगर विकास विभाग द्वारा गृह कर निर्धारण से संबंधित अधिनियम से संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने का फैसला किया गया है। इसे जल्द ही कैबिनेट में मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।